Home | The Days | International Days | World Rabies Day --- Continuous

Sections

Newsletter
Email:
Poll: Like Our New Look?
Do you like our new look & feel?

World Rabies Day --- Continuous

Font size: Decrease font Enlarge font

<‌‌‌‌‌‌---‌‌‌पीछे पढ़ें

 प्रश्न: ‌‌‌‌‌‌यदि काटने वाले कुत्ते/बिल्ली को पहले ही टीकाकरण हुआ हो तो क्या टीकाकरण करवाना चाहिए?

‌‌‌उत्तर: नहीं, यदि कुत्ते/बिल्ली को रेबीज के प्रति ठीक से टीकाकरण हुआ है और इसकी प्रभावशक्ति का प्रयोगशाला द्वारा पुष्टि की गई है तो प्रतिषेधोपचार की आवश्यकता नहीं है। अन्यथा उपयुक्त पोस्ट-एक्सपोजर प्रतिषेधोपचार अनिवार्य है। मनुष्य को कुत्ते/ बिल्ली द्वारा काटे जाने पर वैक्सीन लगवाने की आवश्यकता नहीं है यदि

·         कुत्ते/बिल्ली का स्वास्थ्य ठीक है

·         जन्म से नियमित वैक्सीन लगी हुई है

·         पंजीकृत पशु चिकित्सा चिकित्सक (Registered Veterinary Practicenor) की देख-रेख में रेबीज की वैक्सीन वैक्सीन लगी हुई है वैक्सीन कार्ड पर उसके हस्ताक्षर हैं

 Ö लेकिन नाखून से खरोंच लगने या कुत्ते/बिल्ली को वैक्सीन नहीं लगे होने की स्थिति में पोस्ट-एक्सपोजर 5 टीके लगवाना अनिवार्य है।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌‌‌‌यदि किसी को चूहे ने काट लिया है तो क्या रेबीज के लिए टीकाकरण करवाना चाहिए?

‌‌‌उत्तर: ‌‌‌चूहों में रेबीज अत्यंत दुर्लभ है लेकिन कुछ एशियाई देशों में चूहों में यह बीमारी पायी गई है। घेरलू चूहों के काटने पर प्रतिषेधोपचार काटने से पूर्व (Pre-bite exposure) का टीकाकरण करवाया जाना चाहिए लेकिन जंगली चूहों के काटने पर पूर्ण टीकाकरण (Post-bite exposure) ‌‌‌चिकित्सक की देखरेख में करवाना अति-आवश्यक है।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌‌‌‌क्या टीकाकरण के बाद भी कुत्तों में रेबीज हो सकती है?

‌‌‌उत्तर: ‌‌‌हाँ, टीकाकरण किये कुत्तों में आंशिक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के कारण लकवाग्रस्त वर्ग की रेबीज के लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं। (Tepsumethanon et al. 2016)

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌यदि मुझे चमगादड़ काटा है तो क्या किया जाना चाहिए?

‌‌‌उत्तर: ‌‌‌चमगादढ़ के काटने पर भी उसी प्रकार घाव को साफ करना चाहिए जैसे कि कुत्ते के काटने पर किया जाता है।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: क्या बीमार या मरे हुए कुत्ते को हाथ में उठाना चाहिए?

‌‌‌उत्तर: वैज्ञानिक सलाह के अनुसार आप गली में पड़े बीमार या मरे हुए कुत्ते को कभी नं उठाएं क्योंकि कुत्ते ‌‌‌सुस्त रेबीज (Dumb rabies) की स्थिति में उसके नजदीक जाने वाले इंसान खासकर बच्चों को काट लेता है इसलिए बच्चों को इस बारे में जागरूक करना चाहिए।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌‌‌‌क्या बीमार या मरे हुए चमगादढ़ को हाथ में उठाना चाहिए?

‌‌‌उत्तर: वैज्ञानिक सलाह के अनुसार आप बीमार या मरे हुए चमगादढ़ को न उठाएं यदि उठाना ही है तो सावधानीपूर्वक व हाथों में दस्ताने पहनकर ही उठाएं व उसके बाद उन दस्तानों को भूमि में दबा दें।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌‌‌‌क्या किसी रेबीज से ग्रसित पशु के दूध का सेवन करना चाहिए?

‌‌‌उत्तर: ‌‌‌ऐसा कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है जो यह बताता है कि रेबीज से ग्रसित गाय/भैंस के दूध से किसी मनुष्य को रेबीज हुई हो। फिर रेबीज से ग्रसित पशुओं से दूध के उपभोग करने की सलाह नहीं दी गई है।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌क्या रेबीज से संक्रमित जानवर का माँस खाने से मनुष्य में रेबीज हो सकती है?

‌‌‌उत्तर: रेबीज से संक्रमित जानवर का कच्चा माँस खाने के उपरान्त टीकाकरण करवाना चाहिए। उबले हुए माँस से रेबीज नहीं होती है, फिर रेबीज से संक्रमित जानवर के माँस के उपभोग करने की सलाह नहीं दी गई है।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: रेबीज ‌‌‌वैक्सिनेशन कितनी तरह की होती है?

‌‌‌उत्तर: ‌‌‌वैक्सिनेशन दो प्रकार का होता है - प्री-एक्सपोजर रोगनिरोधक (Pre-exposure prophylactic) एवं पोस्ट-एक्सपोजर रोगनिरोधक (Post-exposure prophylactic)

1. प्री-एक्सपोजर रोगनिरोधक: कभी भी शुरू करके प्रति वर्ष लगवाया जा सकता है। पशुपालकों, पशु पालन विभाग के कर्मचारियों, डॉग ब्रीडर, पशुओं की खाल उतारने वाले, पशुओं को पकड़ने वाले MC कर्मी, वन्यजीव विभाग कर्मी, बूचड़खाना कर्मी, मीट की दुकान कर्मी या अन्य व्यक्ति जो पशुओं के संपर्क में रहते हैं के लिए केवल तीन टीके रोगनिरोधी (Prophylactic) 0, 7 तथा 21 या 28 दिनों में लगवा कर फिर हर साल एक बार लगवाया जा सकता है।

2. पोस्ट-एक्सपोजर रोगनिरोधक: जब पागल कुत्ता काट लेता है तो पाँच से छः टीके 0, 3, 7, 14, 28 इसके बाद जरूरत हो तो 90 वें दिनों पर वैक्सीन लगाई जाती है।

नोट: जिस कम्पनी/ ब्रांड की वैक्सीन पहले दिन लगवाई अच्छे परिणाम के लिए उसी की लगवानी चाहिए। जिस दिन कुत्ता काटे उसी दिन वैक्सीन लगवानी चाहिए उसे 0 दिन कहा जाता है।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: क्या गर्भवती / स्तनपान करवाती महिलाएं या बीमार इन्सानों ‌‌‌को यह वैक्सीन लगवायी जा सकती हैं?

उत्तर: बिलकुल हाँ पागल कुत्ते के काटने या किसी अन्य माध्यम द्वारा यदि किसी को रेबीज होने का खतरा लगता है तो किसी भी शारीरिक स्थिति में यह वैक्सीन समय पर लगवानी चाहिए इसका इंसान या गर्भ मे पल रहे बच्चे पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता इसके अलावा चाहे किसी और बीमारी की दवा भी ले रहे हों तो भी वैक्सीन जरूरी है।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: रेबीज वैक्सीन शरीर के किस हिस्से पर तरह और कितना लगाया जाता है?

‌‌‌उत्तर: इन्सानों में यह टीका

1. ‌‌‌अंतःपेशीय ‌‌‌अर्थात माँस में (Intramuscular): केवल कंधे (ऊपरी बांह) पर डेल्टोइड नामक मांस में व छोटे बच्चों में यह वैक्सीन ‌‌‌जंघा (thigh) में लगायी जाती है और कूल्हे में कभी नहीं लगाया जाता। छोटे से बड़े इंसान को केवल 0.5 ml ही वैक्सीन लगाया जाता है।

2. अंतर्त्वचीय अर्थात त्वचा के अंदर (Intradermal): 28 गाज की पतली सुई से चमड़ी के नीचे कुशल (skilled) स्वास्थ्य कर्मी द्वारा 0.1 ml वैक्सीन लगाई जाती है।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌क्या मानव के लिए रेबीज का ऐसा वैक्सिन जो एक बार लगाने भर से जीवनभर प्रतिरक्षा प्रदान कर सके?

‌‌‌उत्तर: ‌‌‌नहीं, विश्व में कहीं भी रेबीज की ऐसी वैक्सिन नहीं है जो जीवनभर प्रतिरक्षा करती है। एकल खुराक के टीके उपलब्ध हैं, लेकिन ये टीके सीमित अवधि के लिए प्रतिरक्षा प्रदान करते हैं।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌‌‌‌क्या वैक्सिन से भी रेबीज हो सकती है?

‌‌‌उत्तर: मानव उपयोग के लिए सभी रेबीज के टीके निष्क्रिय (inactivated) होते हैं। ‌‌‌इसलिए रेबीज वैक्सिन इस रोग का कारण बनना संभव नहीं है।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌रेबीज की रोकथाम और नियंत्रण के लिए क्या किया जा सकता है?

‌‌‌उत्तर: पशु चिकित्सकों या स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा सुझाव अनुसार अपने ‌‌‌पालतू कुत्तों/बिल्लियों के टीकाकरण जिम्मेदारी निभानी चाहिए ताकि मनुष्यों में इस घातक बीमारी के खतरे को कम किया जा सके। ‌‌‌पालतू कुत्ते/बिल्लि के टीकाकरण का सर्टीफिकेट सुरक्षित रखें ताकि उसे वार्षिक टीकाकरण के दौरान पेश किया जा सके। संदिग्ध रेबीज से संक्रमित जानवर के दूध या माँस को न बेचें व न ही उनका सेवन करें।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌पालतू कुत्तों के लिए रेबीज टीकाकरण अनुसूची क्या है?

‌‌‌उत्तर: पिल्ले अक्सर विश्वसनीय प्रजनक (breeder) से ही लेने चाहिए जो कुत्तियों को रेबीज के लिए टीकाकरण करता हो। टीका लगी हुई मादा के पिल्लों में 3 महीने तक मातृ एंटीबॉडी (Maternal antibodies) होती हैं, इसलिए इन पिल्लों को क्रमश: 3 व 6 महीने की उम्र में रेबीज का टीका लगवाना चाहिए फिर इसके बाद हर वर्ष टीका लगवाना चाहिए। ‌‌‌यदि गली के पिल्लों को पाला जाता है तो भी यही प्रोटोकॉल अपनाना चाहिए। ‌‌‌रेबीज का टीका 2 महीने की उम्र में लगवा सकते हैं लेकिन 3 महीने तक सावधानी ‌‌‌रखें तो अच्छा रहता है। ‌‌‌यदि गली के कुत्ते को पालना है तो पहली वैक्सिन जितना जल्दी हो सके तो लगवा लेनी चाहिए और स्थानीय पशु चिकित्सक की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌अगर मुझे अपने कुत्ते को ‌‌‌रेबीज रोधी ऐंटीबॉडी का स्तर जाँच करवाना हो तो कहाँ करवाया जा सकता है?

‌‌‌उत्तर: रोगप्रतिरोधक ऐंटीबॉटी का स्तर जांचने के लिए ‘पाश्चर इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया’ ‌‌‌तमिल नाडू (भारत) के नीलगिरी जिले में कूनूर में है। इसके लिए रैपिड फ्लोरोसेंट फोकस इन्हिबीशन टेस्ट (आरएफएफआईटी) किया जाता है। यह टेस्ट सीरम से किया जाता है।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ऐंटी-रेबीज सीरम (Rabies immunoglobulin RIG) क्या है? यह कब इस्तेमाल किया जाता है?

उत्तर: ऐंटी-रेबीज सीरम को एंटी-रेबीज वैक्सिन लगाने के दिन ही लगाया जा सकता है। इनको रेबीज इम्युनोग्लोब्यूलिन (Rabies immunoglobulins) कहते हैं।ऐंटी-रेबीज सीरम में, रेबीज वाइरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडी (antibody) होती हैं जो जख्म में व उसके आसपास लगाया जाता है ताकि रेबीज ‌‌‌वायरस शरीर में नं फैले। जब पागल कुत्ते ने इंसान को चेहरे, गर्दन या सिर के आस-पास काट लेता है या जख्म गहरा हो तो यह केवल (Registered Medical Practcenor) डॉक्टर के परामर्श व देख-रेख में इस्तेमाल किया जाता है ।

1. घोड़ों से बनी, इसे संवेदनशीलता (sensitivity) जांच के @40 IU/kg की दर 3000IU तक दिया जा सकता है व

2. इन्सानों से बनी, को बिना संवेदनशीलता (sensitivity) जांच के @20 IU/kg की दर ‌‌‌से 1500 IU तक दिया जा सकता है ।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: मैं एक कुत्ते का पिल्ला खरीदना चाहता हूँ, क्या हरियाणा में डॉग ब्रीडर (Dog breeder) की मान्यता कोई विभाग प्रदान करता है?

‌‌‌उत्तर: ‌‌‌नहीं, हरियाणा में कुत्तों की ब्रीडिंग की मान्यता कोई विभाग प्रदान नहीं करता है। हालाँकि, भारत में केनेल क्लब ऑफ इंडिया (Kennel Club of India) का गठन 1896 में ब्रिटिश राज में हुआ था। ‌‌‌इसके अधीन ही उत्तर, दक्षिण, पूर्व व पश्चिम भारत में ‌‌‌विभिन्न मान्यता प्राप्त केनेल क्लब हैं।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌छोटे पिल्ले ने हमारे बच्चे को काट लिया, क्या हमें घबराने की ज़रूरत है?

‌‌‌उत्तर: ‌‌‌घबराने की आवश्यकता नहीं है, इसके लिए आप नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र में सम्पर्क कर सलाह अवश्य लें।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌पशुपालकों, पशु पालन विभाग के कर्मचारियों व ‌‌‌डॉग ब्रीडर (Dog breeder) के लिए रोगनिरोधी (Prophylactic) टीका कब और कैसे लगवाया जाता है?

‌‌‌उत्तर: ‌‌‌समयपूर्व रोगनिरोधी रेबीज वैक्सिन अवश्य करवाएं।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌अगर कोई पशु जिसके पागलपन जैसे लक्षण दिखे और मर गया तो इसका कैसे पता लगाया जा सकता है कि वो पशु रेबीज़ से मारा?

‌‌‌उत्तर: मरणोंपरान्त, रेबीज का निदान, प्रभावित मस्तिष्क के किसी भी हिस्से से रेबीज वायरस का पता लगाने के लिए किया जा सकता है, लेकिन रेबीज का सही पता करने के लिए परीक्षण में मस्तिष्क के ऊतक नमूने या पशु का पूरा सिर लेकर ‌‌‌उत्तरी भारत में कसोली, हिमाचल प्रदेश ले जाकर जांच कारवाई जा सकती है। ‌‌‌इसी प्रकार दक्षिण भारत में ऐसी रोग निदान प्रयोगशाला दक्षिण भारत में बैंगलोर में भी स्थित है।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌स्वास्थ्य विभाग की तरफ़ से हरियाणा में क्या क्या सुविधाएँ उपलब्ध हैं? आपातक़ालीन स्थिति में रेबीज़ से सम्बंधित सेवाएँ (फ़ोन नं. या विशेष वार्ड)

‌‌‌उत्तर: ‌‌‌हरियाणा राज्य में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर रेबीज वैक्सिन के टीके उपलब्द्ध हैं।

प्रश्न: ‌‌‌क्या हरियाणा राज्य में कुत्ता काटने के उपरान्त कहाँ सम्पर्क किया जा सकता है?

‌‌‌उत्तर: ‌‌‌कुत्ते के काटने के उपरान्त आप स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे किसी भी हस्पताल में सम्पर्क कर सकते हैं। मई 2014 में जस्टिस राजन गुप्ता की अध्यक्षता वाली एक एकल पीठ ने ‌‌‌चण्डीगढ़ शहर में आवारा कुत्ते के खतरे से संबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्देश जारी किया। उच्च न्यायालय ने मार्किट कॉमिटी को पुलिस से समन्वय करने के लिए कहा गया है। इसके अन्तर्गत स्थानीय निवासी पुलिस को फोन करके सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌पशुपालन विभाग की तरफ़ से रेबीज़ के लिए हरियाणा में क्या सुविधाएँ हैं?

‌‌‌उत्तर: ‌‌‌हयिाणा राज्य में नेशनल रेबीज कन्ट्रोल प्रोग्राम के अन्तर्गत रेबीज व अवारा कुत्तों की संख्या को नियन्त्रित करने के लिए एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया के द्वारा चलाया जा रहा है। इसके अन्तर्गत कुत्ते-बिल्ली पालने वालों को रेबीज वैक्सिन के लिए प्रेरित किया जाता है ताकि वे अपने कुत्ते-बिल्ली को समय पर वैक्सिन लगावाएं। साथ ही कुत्तों की संख्या पर नियन्त्रण के लिए उनकी नसबन्धी भी की जाती है। (Principal Secretary 2015).

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌अगर किसी के कुत्ते ने मुझे काटा और वो कहता है कि मेरे कुत्ते को टीका लगा हुआ है तो उसके record में क्या देखना चाहिए?

‌‌‌उत्तर: ‌‌‌रेबीज वैक्सिन का रिकॉर्ड देखना चाहिए।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌पोस्ट एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस के बाद क्या टीकाकरण विफल (Vaccination failure) होने की कोई संभावना है?

‌‌‌उत्तर: लापरवाही और व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति से संबंधित विभिन्न कारकों के कारण, पोस्ट एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस के बावजूद कभी-कभी मानव रेबीज मामलों की सूचना मिली है। अधिकांश मामलों में देरी से होने वाली वैक्सीन, या रेबीज इम्यूनोग्लोब्यूलीन का प्रयोग न करने, या अधूरा वैक्सीन वैक्सिन विफलता के कारण हैं। कुछ मामले शारीरिक प्रतिरक्षा-समझौतों की स्थिति से संबंधित भी हैं। कुछ केस ऐसे भी हुए हैं जिनमें सब-कुछ ठीक था लेकिन अस्पष्ट विफलता भी देखने को मिली है।

‌‌‌‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌क्या एंटी-रेबीज टीकाकरण के दौरान कोई दवा या आहार प्रतिबन्धित है?

‌‌‌उत्तर: ऐसी सभी दवाएं (जैसे कि स्टेरॉयड, क्लोरोक्वाइन (विरोधी मलेरिया दवा) और कैंसर-रोधी) जो शारीरिक प्रतिरक्षा तन्त्र को कमजोर करती है उनका सेवन करने की मनाही की जाती है। ‌‌‌फिर भी ऐसी स्थिती में रेबीज वैक्सिन का टीका काटने वाली जगह चारों ओर लगाया जाना चाहिए। टीकाकरण के दौरान कोई आहारीय प्रतिबंध नहीं है।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌क्या रेबीज टीकाकरण का कोई प्रतिकूल प्रभाव है?

‌‌‌उत्तर: इंजेक्शन की साइट पर दर्द, लालिमा, जलन या सूजन जैसे हल्के लक्षण हो सकते हैं। कुछ रोगियों में सामान्य लक्षण जैसे सिरदर्द, बुखार और इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी देखी जा सकती है। ‌‌‌ये सभी लक्षण अस्थायी हैं और अपने-आप ठीक हो जाते हैं। ‌‌‌इसलिए बीच में ही वैक्सिन लगवानी बन्द नहीं करनी चाहिए। (WHO, 2013)

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: एंटी-रेबीज टीकाकरण की रोगी पर एंटीबॉडी परीक्षण करना आवश्यक है?

‌‌‌उत्तर: ‌‌‌नहीं, इसकी आवश्यकता कुछ ही मेडिकल कन्डीशन जिनमें शारीरिक प्रतिरक्षा तन्त्र कमजोर होता है उन्ही मामलों में इसकी आवश्यकता हो सकती है।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌क्या नैदानिक लक्षणों से पहले रेबीज का टेस्ट होता है?

‌‌‌उत्तर: ‌‌‌हाँ, नैदानिक लक्षणों से पहले रेबीज का टैस्ट किया जा सकता है। त्वचा की पंच बायोप्सी (Skin punch biopsy), इसकी प्रक्रिया निदान प्राप्त होने तक दोहराई जाती है। लार (Saliva), आँसू (Tears), मस्तिष्कमेरु द्रव (Cerebrospinal fluid), इसकी प्रक्रिया निदान प्राप्त होने तक दोहराया जाता है। इसका टेस्ट सीरम से भी किया जा सकता है।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: क्या गाय, भैंस, घोड़ा, कुत्ता या बिल्ली के लिए रेबिज वैक्सीन अलग-अलग होती है यह कैसे लगाई जाती है?

‌‌‌उत्तर: ‌‌‌नहीं, इनके लिए अलग-अलग वैक्सीन नहीं होती है। जैसे कि भारत में निर्मित रक्सारब बाजार में उपलब्द्ध है जिसकी मात्रा 1 मि.ली. प्रति पशु है। इसको अंतःपेशीय (Intramuscular) या चमड़ी के नीचे (Subcutaneous) लगाया जाता है।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: क्या मनुष्यों में लगने वाली वैक्सीन पशुओं में लगाई जा सकती है?

‌‌‌उत्तर: ‌‌‌नहीं, कभी भी मनुष्यों की में लगने वाली रेबीज वैक्सीन पशुओं में और पशुओं में लगने वाली वैक्सनी मनुष्यों में नही लगानी चाहिए।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: नज़दीकी दवाई की दुकान या कोई अपंजीकृत डाक्टर से वैक्सीन करवाना चाहिए?

‌‌‌उत्तर: ‌‌‌नही, कभी भी अपंजीकृत या अमान्य चिकित्सक से रेबीज वैक्सीन नहीं लगवानी चाहिए।

संदर्भ 

A letter by Principal Secretary to Govt. of Haryana, Animal Husbandry & Dairying Department dated March 4, 2015. [Web Reference]

Aguèmon C.T., et al., 2016, “Rabies transmission risks during peripartum–Two cases and a review of the literature,” Vaccine; 34(15): 1752-1757. [Web Reference]

Consales C.A. and Bolzan V.L., 2007, “Rabies review: immunopathology, clinical aspects and treatment,” Journal of Venomous Animals and Toxins including Tropical Diseases; 13(1): 5-38. [Web Reference]

de Souza A. and Madhusudana S.N., 2014, “Survival from rabies encephalitis,” Journal of the neurological sciences; 339(1): 8-14. [Web Reference]

GARC, “Rabies: Zero by 30,” Global Alliance for Rabies Control, retrieved on September 13, 2017 [Web Reference]

KCI, “Kennel Clubs of India,” Retrieved on September 23, 2017. [Web Reference]

Radostits O.M., et al., 2010, “Veterinary Medicine: A textbook of the diseases of cattle, horses, sheep, pigs and goats,” Elsevier Health Sciences; p. 1389.

Seetahal J.F.R., et al., 2017, “The History of Rabies in Trinidad: Epidemiology and Control Measures,” Tropical Medicine and Infectious Disease; 2(3): 27. [Web Reference]

Subramaniam R., 2016, “Human Rabies Survivors in India: An Emerging Paradox?,” PLoS neglected tropical diseases; 10(7): e0004774. [Web Reference]

Tepsumethanon V., et al., 2016, “Dogs that develop rabies post-vaccination usually manifest the paralytic subtype,” Preventive veterinary medicine; 131: 64-66. [Web Reference]

The Times of India, 2014, “Call police helpline for dog bites: Chandigarh high court,” retrieved on September 19, 2017. [Web Reference]

WHO, 2013, "Frequently Asked Questions on Rabies," World Health Organization, Regional Office for South-East Asia. [Web Reference]

Zhu J-Y, Pan J and Lu Y-Q., 2015, “A case report on indirect transmission of human rabies,” Journal of Zhejiang University Science B; 16(11): 969-970. [Web Reference]

Tags
No tags for this article
Rate this article
5.00