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World Rabies Day

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रेबीज, Rabies


के.एल. दहिया, ‌‌‌पशु चिकित्सक, राजकीय पशु हस्पताल, हमीदपुर (कुरूक्षेत्र) 

विकास जागलान, ‌‌‌पशु चिकित्सक, राजकीय पशु हस्पताल, नानकपुर (पंचकुला)

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रेबीज, मानव जाति के लिए सबसे पुरानी बीमारियों में से एक मानी जाती है। विलक्षित लक्षणोंपरान्त इस बीमारी का अभी तक कोई भी ईलाज सम्भव नहीं हो पाया है। आज भी पुराने समय में लगाये जाने वाले टीकाकरण से लोग भयभीत रहते हैं। लेकिन आज इस बीमारी की रोकथाम के लिए इस प्रकार के टीकाकरण से डरने की आवश्यकता नहीं है। आज भी प्राय: यह देखने में आता है कि रेबीज से ग्रसित पशु खासतौर पर कुत्ते के काटने के बाद भी लोग बाबाओं के पास झाड़ा लगवाते हैं, जो कि आधुनिक युग में एक चिन्ता का विषय है। इस बीमारी का निदान ही समय पर टीकाकरण है। टीकाकरण में देरी मृत्यु की बेवजह कारक बन सकती है।

‌‌‌विश्वभर में प्रतिवर्ष लगभग 61000 मौतें रेबीज से होती हैं। अकेले भारत में लगभग 20000 व्यक्ति इस बीमारी से मौत के मुँह में चले जाते हैं। यह आंकड़ा कम ही हो सकता है क्योंकि यह सूचनीय रोग नहीं है जिस कारण पशुओं एवं मनुष्यों में रेबीज के लिए सुव्यवस्थित निगरानी नही की जाती है।

‌‌‌रेबीज के उन्मूलन के लिए प्रतिवर्ष 28 सितम्बर को ‘विश्व रेबीज दिवस’ मनाया जाता है। वर्ष 2017 में मनाए जाने वाले ‘विश्व रेबीज दिवस’ थीम ‘रेबीज़: 2030 तक शून्य’ है। इसके अन्तर्गत 2030 तक रेबीज को विश्व से उन्मूलन का लक्ष्य है ताकि कोई भी रेबीज से असमय मृत्यु का ग्रास न बने।

‌‌‌हमारा इस लेख के माध्यम से यही प्रयास है कि जन-मानस के दिमाग में इस बीमारी सम्बन्धित मन में उभरते सवालों के उत्तर हैं, ताकि आमजन इस बीमारी के बारे में जान सके व अपनी और अन्य की समय रहते जान बचा सकें। तो आईये! इन ‌‌‌प्रश्नोत्तरों पर एक नजर अवश्य डालें।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: रेबीज क्या है?

‌‌‌उत्तर: रेबीज एक ऐसी बीमारी है जो पशुओं से मनुष्यों में फैलती है। यह ‌‌‌लीसा वायरस (Lyssa virus) के कारण होता है। इसमें दो तरह के लक्षण दिखाई देते हैं 1. उत्तेजक (frantic) और 2. सुस्त /लकवाग्रस्त (paralytic)। उन्मत्त/उत्तेजक प्रकार रेबीज का सबसे ज्यादा देखा जाने वाला रूप है

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌रेबीज किस कारण से होता है?

‌‌‌उत्तर: ‌‌‌रेबीज लिसा वायरस (Lyssavirus) से होता है जो रबडोविरिडी परिवार (Rhabdoviridae family) से सम्बन्ध रखता है।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: रेबीज कैसे संचरित या फैलता है?

‌‌‌उत्तर: रेबीज इन्सानों या पशुओं में एक जैसे तरीके से फैलता है। यह मुख्य रूप से जब पागल ‌‌‌कुत्ता किसी मनुष्य या किसी पशु को काटता है तो उसकी लार काटने वाले स्थान के माध्यम से उसमें चली जाती है और रेबीज वायरस शरीर में तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है और मनुष्य/ पशु रेबीज की गिरफ्त में आ सकता है। वायरस के ‌‌‌मस्तिषक में पहुंचने के बाद व्यक्ति-विशेष के व्यवहार में परिवर्तन देखने को मिलता है।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌रेबीज संक्रमण को प्रभावित करने वाले क्या कारक हैं?

‌‌‌उत्तर: ‌‌‌रेबीज संक्रमण निम्नलिखित कारकों से प्रभावित होता है:

1.    पशु ने शरीर के किस जगह अर्थात सिर, गर्दन, बाजू या हाथों पर काटा है। मस्तिष्क के जितना ज्यादा नजदीक काटा जाएगा रेबीज संक्रमण उतना जल्दी होगा।

2.    जोखिम का प्रकार जैसे कि रेबीज पशु के सम्पर्क में आए हैं या उसने आपको काटा है।

3.    काटने की गंभीरता: ‌‌‌यदि काटने वाले स्थान से खून निकाल रहा हो तो रेबीज संक्रमण उतना जल्दी होगा।

4.    रेबीज वायरस की मात्रा शरीर में कितनी गई है।

5.    किस जानवर ने काटा है।

6.    व्यक्ति विशेष ‌‌‌की प्रतिरक्षा प्रणाली: बच्चे, बूढ़े या बीमार इन्सानों को रेबीज संक्रमण जल्दी होने की संभावना है।

प्रश्न: ‌‌क्या उन्मत्त पशु के काटने के अलावा भी यह वायरस मनुष्य को संक्रमित कर सकता है?

‌‌‌उत्तर: ‌‌‌हाँ, इस बीमारी से उन्मत्त पशु मनुष्य के जख्म या कटी-फटी त्वचा को चाटता है या जीभ से छूता है तो यह वायरस उस मनुष्य में प्रवेश जाता है। यह वायरस मुँह व नासिका के माध्यम ये ‌‌‌प्रवेश कर जाता है।

प्रश्न: यदि काटने वाले कुत्ते में बीमारी के लक्षण दिखायी नहीं तो क्या रेबीज वायरस का संक्रमण हो सकता है?

‌‌‌उत्तर: ‌‌‌हाँ, कुत्ते में रेबीज के पूरे लक्षण आने से तीन दिन पहले उसकी लार में यह वाइरस आना शुरू हो जाता है तो मनुष्य के जख्म या कटी-फटी त्वचा को इस बीमारी से ग्रस्त पशु चाटता है या जीभ से छूता है तो यह वायरस उस मनुष्य में प्रवेश जाता है।

प्रश्न: ‌‌‌‌‌क्या कुत्ते/बिल्ली या जानवर के काटने के अलावा भी किसी अन्य से रेबीज वायरस फैलता है?

‌‌‌उत्तर: ‌‌‌हाँ, चौपाए जानवरों के अलावा वैम्पायर चमगादढ़ के काटने से भी यह रेबीज वायरस मनुष्य या इन जानवरों में फैलता है। (Seetahal et al., 2017)

‌‌‌प्रश्न: क्या गर्भवती महिला या पशु से उसके गर्भस्थ बच्चे को रेबीज वायरस का संक्रमण हो सकता है?

‌‌‌उत्तर: माँ से बच्चे को रेबीज वायरस का संचरण संभव है, लेकिन यह दुर्लभ है, क्योंकि रेबीज वायरस रक्त में मौजूद नहीं होता और गर्भस्थ बच्चे के श्लेष्मात्मक उत्तक मातृ संक्रामित तरल पदार्थ और ऊतकों का संपर्क सीमित होता है। (Aguèmon et al., 2016)

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌किन पशुओं से यह वायरस मनुष्यों में ‌‌‌फैलती है?

‌‌‌उत्तर: दक्षिण-पूर्व एशिया में इस वायरस के ‌‌‌फैलने के 96 प्रतिशत मामलों में कुत्ते ‌‌‌ही जिम्मेदार हैं। कुत्तों के अलावा यह वायरस बिल्ली, नेवला, सियार, लोमड़ी, भेड़ीया और अन्य मांसभक्षी जानवरों के काटने से भी फैलता है। बन्दरों व चुहों के काटने से भी यह वायरस मनुष्यों में फैलता है लेकिन इसके मामले बहुत कम हैं। बीमारी से ग्रसित गदों व घोड़ों के काटने से भी यह वायरस फैलता है। गाय व भैंस काटते नहीं है लेकिन इस वायरस से ग्रसित बीमार गाय या भैंसों की जाँच के दौरान सावधानी अवश्य बरतनी चाहिए। साँप के काटने से रेबीज बीमारी नहीं होती।

‌‌‌‌‌‌‌‌‌प्रश्न: क्या साँप या अन्य असमतापी जीवों (Cold blooded animals) से भी रेबीज फैल सकता है?

‌‌‌उत्तर: ‌‌‌नहीं, यह वायरस असमतापी जीवों के काटने से नहीं फैलता, यह केवल समतापी जानवरों (Warm blooded animals) से ही फैलता है।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: क्या पशुओं में इस बीमारी के जैसे लक्षण वाली बीमारीयाँ भी है?

‌‌‌उत्तर: उत्तर: हाँ, मुँह पका-खुर पका रोग, गलघोटू, सर्रा, विटामिन बी1 की कमी और खाने की वस्तु का पशु के गले में फंसना आदि इस बीमारी से भ्रमित करते हैं। पशुओं में पागलपन, मुह से लार टपकना या गले में रुकावट जैसे लक्षण की स्थिति में पशुचिकित्सक से जांच व इलाज करवाना चाहिए।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌क्या‌‌‌ प्रभावित पशु का दूध ‌‌‌पीने या माँस खाने से रेबीज हो सकती है?

‌‌‌उत्तर: ‌‌‌रेबीज वायरस प्रभावित पशुओं के दूध में आ सकता है, लेकिन रेबीज का वाइरस दूध गर्म करने से खत्म हो जाता है । आज तक दूध के सेवन के कारण होने वाली मानव रेबीज की कोई साक्ष्य-आधारित रिपोर्ट नहीं है। फिर ‌‌‌भी रेबीज से ग्रसित पशुओं से दूध के उपभोग करने की सलाह नहीं दी जाती है। (Radostits et al., 2010)

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌क्या‌‌‌‌‌‌ रेबीज से ग्रसित पशु का माँस खाने से रेबीज हो सकती है?

‌‌‌उत्तर: रेबीज का वाइरस मीट पकाने से खत्म हो जाता है। रेबीज से ग्रसित पशुओं के माँस का उपभोग करने की सलाह नहीं दी जाती है।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌क्या रेबीज अंग प्रत्यारोपण से भी हो सकता है?

‌‌‌उत्तर: ‌‌‌हाँ, रेबीज से ग्रसित व्यक्ति के अंगों का प्रत्यारोपण करने से भी हो सकती है। (Aguèmon et al. 2016)

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: पागल कुत्ते के काटने के बाद तुरंत प्राथमिक उपचार कैसे किया जाए?

‌‌‌उत्तर: यदि किसी व्यक्ति कोई जानवर काट लेता है तो घाव को इस प्रकार ईलाज करें:

1.    घाव को तुरन्त पानी व साबुन के साथ 10-15 मिनट तक धोना चाहिए। यदि साबुन समय पर उपलब्द्ध नहीं है तो अकेले पानी से ही घाव को धो लेना चाहिए। यह रेबीज के प्रति सबसे प्रभावी प्राथमिक चिकित्सा उपचार है।

2.    जलन उत्पन्न करने वाले पदार्थ जैसे कि अचार, मिर्च पाउडर, पौधे के रस, एसिड या क्षार घाव पर नहीं लगाने चाहिए।

3.    घाव को टांके नहीं लगाने चाहिए, ड्रेसिंग या पट्टियों के साथ नही ढकना चाहिए।

4.    यदि उपलब्ध हो तो 70% ‌‌‌एल्कोहॉल/इथेनॉल या पॉवीडोन-आयोडीन के साथ घावों को अच्छी तरह साफ किया जाना चाहिए।

5.    जितनी जल्दी हो सके, आगे के उपचार के लिए संक्रमित व्यक्ति को स्वास्थ्य केन्द्र में ले जाएं और तुरंत रेबीज व टैटनस का वैक्सीन लगवाकर साथ में जख्म का इलाज करवाएँ।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌एक जानवर के काटने के घाव के साथ क्या नहीं किया जाना चाहिए?

‌‌‌उत्तर: ‌‌‌1. जलन उत्पन्न करने वाले पदार्थ जैसे कि मिर्च पाउडर, पौधे के रस, एसिड या क्षार घाव पर नहीं लगाने चाहिए। 2. घाव को ड्रेसिंग या पट्टियों के साथ नही ढकना चाहिए।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌मानव में रेबीज कैसे विकसित होता है?

‌‌‌उत्तर: मानव शरीर में प्रवेश करने के बाद, रेबीज वायरस त्वचा (चमड़ी के नीचे वाले ऊतक), या मांसपेशियों से नीचे की ऊतक की अंदरूनी परत से परिधीय तंत्रिकाओं (peripheral nerves) (अर्थात शरीर में मस्तिष्क या मेरुदंड से बाहर तंत्रिकाओं) के माध्यम से आगे बढ़ता है। यह वायरस प्रति दिन 12-24 मिमी की अनुमानित गति की दर से मेरूदण्ड और मस्तिष्क तन्त्रिकाओं के माध्यम से आगे बढ़ता है। वायरस के मस्ष्तिक में पहुंचने के बाद व्यक्ति-विशेष के व्यवहार में परिवर्तन देखने को मिलता है।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌रेबीज वायरस के शरीर में प्रवेश के कितने समयोपरान्त लक्षण परिलक्षित होते हैं?

‌‌‌उत्तर: इस वायरस का रोगोद्भवन काल (Incubation period) कुछ दिनों से लेकर कई महीनों तक होता है। रोगोद्भवन काल एक वर्ष भी हो सकता है।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌‌‌‌क्या कुत्ते के द्वारा काटे गये व्यक्ति के घाव से अन्य स्वस्थ व्यक्ति को रेबीज का खतरा हो सकता है?

‌‌‌उत्तर: ‌‌‌हाँ, ‌‌‌ऐसी साक्ष्य रिपोर्ट भी है जिनमें दर्शाया गया है कि यदि एक स्वस्थ व्यक्ति जिसके हाथों पर घाव हों, रेबीड कुत्ते द्वारा काटे गये व्यक्ति के घावों को साफ करता है तो वह खतरे में है। (Zhu, Pan and Lu 2015)

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌क्या कारक हैं जो रेबीज के विकास को प्रभावित करते हैं?

‌‌‌उत्तर: रेबीज संक्रमण के विकास को प्रभावित करने वाले कारकों में शामिल हैं:

·         जोखिम का प्रकार जैसे कि रेबीज पशु के सम्पर्क में आए हैं या उसने आपको काटा है।

·         काटने की गंभीरता।

·         रेबीज वायरस की मात्रा शरीर में कितनी गई है।

·         किस जानवर ने काटा है।

·         व्यक्ति विशेष कर प्रतिरक्षा प्रणाली।

·         पशु ने किस जगह अर्थात सिर, गर्दन, बाजू या हाथों पर काटा है। मस्तिष्क के जितना ज्यादा नजदीक काटा जाएगा संक्रमण का रोगोद्भवन काल (Incubation period) उतना ही कम होगा।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: रेबीज वायरस के शरीर में प्रवेश के कितने समयोपरान्त लक्षण दिखाई देते हैं?

‌‌‌उत्तर: कुछ दिनों से लेकर कई महीने (‌‌‌3 हफ्ते से लेकर 3 वर्ष) तक का रोगोद्भवन काल होता है।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌‌‌‌लक्षणोंपरान्त कितने दिन तक जानवर जिन्दा रहता है?

‌‌‌उत्तर: ‌‌‌1-7 दिन तक।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌कुत्तों में रेबीज की नैदानिक विशेषताएं (Clinical features) क्या हैं?

‌‌‌उत्तर: किसी भी प्रकार के उकसाने के बिना काटना; लाठी-डण्डा, नाखून, मल, आदि जैसे असामान्य वस्तुओं को खाना; किसी अस्पष्ट कारण के चलना; ध्वनि परिवर्तन जैसे कि कर्कश भौंकना और गुर्राना या ध्वनि निकालने में असमर्थ होना; मुँह से अत्यधिक लार गिरना या झाग बनना - लेकिन हाइड्रोफोबिया (पानी का डर) नहीं।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌मनुष्यों में रेबीज के लक्षण क्या हैं?

‌‌‌उत्तर: काटने के घाव की जगह पर दर्द या खुजली (80% मामलों में); 2-4 दिनों के लिए स्थायी - बुखार, अस्वस्थता, सिरदर्द; हाइड्रोफोबिया (पानी का डरना); शोर, तेज प्रकाश या हवा के प्रति सहनशीलता कम होना; मृत्यु का असमय भय; क्रोध, चिड़चिड़ापन और अवसाद; अतिक्रियाशीलता; बीमारी के अन्तिम चरण में केवल पानी की तरफ दृष्टि करने मात्र से गर्दन और गले में ऐंठन उत्पन्न हो जाती है। ‌‌‌रेबीज से ग्रस्त मनुष्य में दो प्रकार के लक्षण देखने को मिल सकते हैं - प्रारम्भिक व गंभीर लक्षण

प्रारम्भिक लक्षण: काटने के घाव की जगह पर दर्द या खुजली (80% मामलों में); 2-4 दिनों के लिए स्थायी - बुखार, अस्वस्थता, सिरदर्द; हाइड्रोफोबिया (पानी का डरना); शोर, तेज प्रकाश या हवा के प्रति सहनशीलता कम होना।

गंभीर लक्षण: तीव्र सिर-दर्द, मृत्यु का असमय भय;, अजीब व्यवहार (कभी चिड़चिड़ापन, कभी उदास, कभी बेचैन कभी क्रोध और अवसाद); अनियंत्रित उत्तेजना; गले में लकवापन (बोलने में तकलीफ, खाने व पानी निगलने में असमर्थता, सांस लेने में तकलीफ); मृत्यु के नजदीक दौरे के साथ लकवा भी हो जाता है; कोमा बीमारी के अन्तिम चरण में केवल पानी की तरफ दृष्टि करने मात्र से गर्दन और गले में ऐंठन उत्पन्न हो जाती है।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌लक्षणोंपरान्त कितने दिन तक मनुष्य ‌‌‌जीवित रहता है?

‌‌‌उत्तर: बीमारी की अवधि आमतौर पर 2-3 दिन होती है, लेकिन गहन चिकित्सकीय सहायता से 5-6 दिन या अधिक समय (14 दिन) तक की अवधि हो सकती है। (Aguèmon et al. 2016) ‌‌‌सामान्यत: लक्ष्णोंपरान्त 5.7 दिन तक ही व्यक्ति जीवित रहता है लेकिन 2012-14 के दौरान 6 ऐसे मरीज भी पाए गये जो 2 सप्ताह से लेकर 3 महीने तक जीवित रहे हैं। (Subramaniam 2016)

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌क्या रेबीज रोगी के लिए कोई विशेष उपचार है?

‌‌‌उत्तर: ‌‌‌नहीं, रेबीज विकसित होने पर कोई विशेष उपचार नहीं होता है। रोगी को आराम से रखने के अलावा लगभग कुछ भी नहीं किया जा सकता है, और शारीरिक दर्द और भावनात्मक परेशान से ही मुक्त करने का प्रयास किया जा सकता है।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌‌‌‌रेबीज से ग्रसित मरीज की देखभाल करने वालों द्वारा क्या सावधानियां ली जानी चाहिए?

‌‌‌उत्तर: देखभाल करने वाले व्यक्ति को मरीज द्वारा काटने व उसकी लार के संक्रमण से बचने के लिए व्यक्तिगत संरक्षण उपकरण का उपयोग करना चाहिए। देखभाल करने वाले व्यक्ति को मरीज द्वारा काटने व उसकी लार के संक्रमण से बचने के लिए हाथों में दस्ताने, मुँह पर मास्क (Mask) व आँखों पर ‌‌‌चश्मों (Gogles) का उपयोग करना चाहिए।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌‌‌‌क्या रेबीज हमेशा घातक होती है?

‌‌‌उत्तर: अति उत्कृष्ट रेबीज वायरस की वजह से मानव रेबीज लगभग 100% घातक रहा है, विश्व में कहीं भी कोई विशिष्ट उपचार उपलब्ध नही है। ‌‌‌विश्व में 15 मनुष्य ही रेबीज से लक्ष्णोपरान्त बच सके हैं। (Subramaniam 2016, de Souza and Madhusudana 2014)

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: ‌‌‌क्या कुत्ता या बिल्ली के काटने के बाद 10 दिनों तक उपचार के लिए इन्तजार करना उचित है?

‌‌‌उत्तर: ‌‌‌नहीं, ऐसे देश जहाँ पर कुत्ते-बिल्लियों की ज्यादा संख्या में रेबीज वायरस है, उपचार शुरू करना अनिवार्य है और अवलोकन के 10 दिनों के तहत काटने वाले कुत्ते / बिल्ली को रखना भी अनिवार्य है। यदि पशु, अवलोकन अवधि के दौरान स्वस्थ रहता है तो काटने के बाद (Post-exposure) के प्रतिषेधोपचार (Prophylaxis) को काटने के पूर्व (Pre-exposure) में परिवर्तित किया जा सकता है अर्थात काटने के पूर्व प्रतिषेधोपचार भविष्य में काटने से बचाव में सहायता करेगा। ‌‌‌इसका अर्थ है ‌‌‌कि पाँच की बजाए चार 0, 3, 7, (-14), 28 (14वें दिन टीका न लगवा कर) टीके लगवाए जाने से भविष्य में काटने से बचाव में सहायता करेगा। यदि यह कुत्ता/बिल्ली मर जाए; गायब हो जाए; असामान्य, अनिश्चित व्यवहार दिखाता है तो पाँच टीके का पूरा कोर्स ‌‌‌अतिआवश्यक है।

‌‌‌‌‌‌प्रश्न: वे क्या शर्तें हैं जिनके तहत कुत्ते-बिल्ली के काटने के बाद एंटी-रेबीज टीकाकरण करना पड़ता है?

‌‌‌उत्तर: यदि किसी पागल या संदिग्ध पागल कुत्ते/बिल्ली ने आपको काट लिया है तो प्रतिषेधोपचार अनिवार्य है। यदि यह कुत्ता/बिल्ली मर जाए; गायब हो जाए; असामान्य, अनिश्चित व्यवहार दिखाता है; यदि प्रयोगशाला उस मरे हुए कुत्ते-बिल्ली को रेबीज के लिए प्रमाणित करती है तो प्रतिषेधोपचार अनिवार्य है।

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