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हानिकारक बनाम लाभदायक खेती – कैंसर, Cancer

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जैसे-जैसे खाद्य सुरक्षा में हम आत्मनिर्भता की अग्रसर होते गये तो इसके साथ-साथ हमारी जन-स्वास्थ्य समस्याएं भी लगातार बढ़ी हैं (Pandey and Singh 2004)। ऐसा लगता है जैसे कि आत्मर्निभरता व इन जन-स्वास्थ्य समस्याओं का चोली-दामन का साथ हो। विश्व स्तर पर हुए शोधों से पता चलता है कि कृषि में उपयोग किये जाने वाले रासायनों का जन-स्वास्थ्य समस्याओं को उत्पन्न करने में विशेष योगदान रहा है। बढ़ती हुई इन जन-स्वास्थ्य समस्याओं में से  कैंसर (Kaur and Sinha 2013, Misra 2008) एक प्रमुख जानलेवा रोग है। कैंसर के कई कारणों में कृषि से उत्पादित प्रदूषित खाद्य-आहार श्रृंखला भी एक है।

रासायानिक खेती: रासायानिक खेती बिना रासायनों के सम्भव नहीं है जिनका मानव के स्वास्थ्य पर बहुत गहरा व बुरा प्रभाव देखने में आया है। इन प्रभावों में से कैंसर भी एक है जिसके संदर्भ में बहुत सारे शोध भी हुए हैं, उनमें कुछ इस प्रकार हैं:

जनवरी 1996 में छपे एक शोधपत्र के अनुसार उत्तरी मध्य अमेरीका में कृषि व्यवसाय में करने वाले श्रमिकों में खरपतवारनाशक, कीटनाशकों व धुआंरी (Fumigant) के कारण लसीकार्बुद (Lymphoma) कैंसर का सम्बन्ध पाया गया (Garry et al. 1996)।

भारत के केरल राज्य में काजू की खेती करने वाले श्रमिकों व ग्रामीणों की सैंकड़ों मौतों और अन्य विकारों को काजू के पेड़ों के ऊपर एंडोसल्फान के स्प्रे से जोड़कर देखा गया है (THANAL 20)। कासरगोड जिले में, जहां कम से कम 15 वर्षों में एन्डोसल्फान का हवाई छिड़का हुआ, एन्डोसल्फान के अवशेषों का स्तर खतरनाक उच्च स्तर का पाया गया है जिससे गांव वालों के रक्त और माताओं के दूध में एन्डोसल्फान के अवशेष और कैंसर बहुत आम हैं (Joshi 2001)।

पंजाब राज्य के भटिंडा एवं रूपनगर में किये गये एक शोध के अनुसार कृषि में उपयोग किये जाने वाले कीटनाशकों का सम्बन्ध स्तन, गर्भाशय / गर्भाशय ग्रीवा, अंडाशय, रक्त एवं लसीका तंत्र, आहारनली और हड्डियों के कैंसर के रूप में पाया गया है जिससे इन मरीजों में मृत्यु देखने को मिली है (Thakur et al. 2008)।

कीटनाशकों से उत्पन्न स्वास्थ्य विकारों के वैज्ञानिक साक्ष्यों में वृद्धि के कारण पंजाब सरकार ने कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम शुरू करने का फैसला किया था। कई शोध पत्रों ने कीटनाशकों से दूषित भू-जल के कारण डीएनए क्षति की बात का खुलासा किया। डीएनए क्षति से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है (Misra 2008)।

चीन में कैंसर के खतरे का आकलन करने के लिए 2005 और 2007 के बीच संचालित किये गये अनेकों मॉडलिंग अनुकरणीय अध्ययनों से पता चलता है कि लिंडेन के उपयोग से गामा-हेक्साक्लोरो-साइक्लोहेक्सेन (γ-HCH, γ- hexachlorocyclohexane) के उत्सर्जन होने से पश्चिमी चीन में कैंसर के खतरे को बढ़ावा मिला है (Xu et al. 2013)।

जैविक खेती: जैविक खेती में रोगों की रोकथाम के लिए कृत्रिम कीटनाशकों का उपयोग वर्जित है। इसमें कृत्रिम कीटनाशकों की जगह जैविक कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है (Leifeld 2016)। इसलिए जैविक उत्पाद में कीटनाशकों के अवशेष भी मौजूद होते हैं। जैविक खाद्य आहार कीटनाशक अवशेषों से पूरी तरह से मुक्त नहीं होते हैं (Brandt and Molgaard 2001, Edwards-Jones and Howells 2001)।

जीरो बजट प्राकृतिक खेती: जीरो बजट प्राकृतिक खेती में रासायन या जैविक कीटनाशक डाले ही नहीं जाते तो आहार श्रृंखला को पूर्णत: जहर-मुक्त कहा जा सकता है। अत: इससे उत्पादित खाद्य आहार के सेवन से कैंसर का कोई भी अंदेशा होने की सम्भावना नहीं है।

जीरो बजट प्राकृतिक खेती जो अपनाए देश।

तो उस देश में कैसे हो कीटनाशकों से कैंसर का आवेश।।

- सरोज बाला दहिया

साभार: डा. जगवीर रावत, (सह-प्राध्यापक - पशु चिकित्सा माइक्रोबायोलॉजी विभाग, लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, हिसार - 125004, हरियाणा, भारत) के मार्गदर्शन के लिए लेखक आभारी हैं।

डा. जे.एन. भाटिया, प्रधान कृषि वैज्ञानिक, चौ.च.सिं. हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार का लेखन शोधन एवं संशोधन के लिए लेखक आभारी हैं।

References

Kaur R. and Sinha A.K., 2013, “Green Revolution and Its Impact on Health: An Analysis." Global Warming, Human Factors and Environment: Anthropological Perspectives; Excel India Publishers New Delhi; p. 264-273. [Web Reference]

Thanal, 2001, “Preliminary Findings of the Survey on the Impacts of Aerial Spraying on the People and the Ecosystem,” Thanal Conservation and Information Network, Thiruvananthapuram, India.

Garry V.F., et al., 1996, “Pesticide appliers with mixed pesticide exposure: G-banded analysis and possible relationship to non-Hodgkin's lymphoma,” Cancer Epidemiology and Prevention Biomarkers; 5(1): 11-16. [Web Reference]

Brandt K. and Molgaard J.P., 2001, “Organic agriculture: does it enhance or reduce the nutritional value of plant foods?,” Journal of the Science of Food and Agriculture; 81(9): 924-931.[Web Reference]

Edwards-Jones G. and Howells O., 2001, “The origin and hazard of inputs to crop protection in organic farming systems: are they sustainable?,” Agricultural Systems; 67(1): 31-47. [Web Reference]

Leifeld J., 2016, “Current approaches neglect possible agricultural cutback under large-scale organic farming. A comment to Ponisio et al.,” Proceedings of the Royal Society B; 283(1824). [Web Reference]

Misra S.S., 2008, “Pesticide–ridden Punjab to begin cancer registration,” Down To Earth; 17(2). [Web Reference]

Pandey J. and Singh A., 2012, “Opportunities and constraints in organic farming: an Indian perspective,” Journal of Scientific Research; 56: 47-72. [Web Reference]

Thakur J.S., et al., 2008, “Epidemiological study of high cancer among rural agricultural community of Punjab in Northern India,” International journal of environmental research and public health; 5(5): 399-407. [Web Reference]

Xu Y., et al., 2013, “Assessing cancer risk in China from γ-Hexachlorocyclohexane emitted from Chinese and Indian sources,” Environmental science & technology; 47(13): 7242-7249. [Web Reference]

Joshi S., 2001, “Children of Endosulfan,” Down to Earth; 19: 28. [Web Reference]

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