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एक देसी गाय से 30 एकड़ खेती - ‌‌‌भाग 1

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‌‌‌‌‌‌‌‌‌के.एल. दहिया* ‌‌‌एवं वजीर सिंह**

* स्नातक, पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान; ग्लोबल सीटी, कुरूक्षेत्र, हरियाणा – भारत

** ‌‌‌पी.एच.डी. एल.एल.बी.; मकान न. 23, सेक्टर 30, कुरूक्षेत्र, हरियाणा, भारत – 136118; ‌‌‌ई-मेल: wazir2330@gmail.com

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जैविक व रसायनिक खेती प्राकृतिक संसाधनों के लिए खतरा है। इनसे अधिक लागत पर जहरीला अनाज पैदा होता है। जिसे खाकर मानव बीमार और धरती बंजर हो रही है। जीव, जमीन, पानी और पर्यावरण को बचाने तथा सुस्वास्थ्य के लिए एक मात्र उपाय है कि शून्य लागत प्राकृतिक खेती। इसके लिए तीस एकड़ पर सिर्फ एक गाय पालने की जरूरत है। एक गाय से ही शून्य लागत पर प्राकृतिक खेती करके प्रत्येक किसान हजारों की बचत के साथ देश व समाज की भलाई भी कर सकता है।

प्राकृतिक विज्ञान के अनुसार किसी भी पेड़-पौधे का 98.5 प्रतिशत शरीर केवल हवा-पानी और सूर्य की रोशनी से बनता है। इसलिए ऊपर से देने की आवश्यकता ही नही है। फसल या पेड़-पौधों में लगभग 78 प्रतिशत पानी व 22 प्रतिशत शुष्क पदार्थ होता है, शुष्क पदार्थ को जलाने के उपरान्त शेष 1.5 प्रतिशत तत्त्व राख के रूप में बचता है। इसका अर्थ है पानी वाष्प बनकर व शुष्क पदार्थ जलने के बाद कार्बनिक पदार्थ हवा में चला जाता है। बाकि का राख तत्त्व भूमि में चला जाता है अर्थात जो जहाँ से आया वहीं चला गया। इसी प्रकार प्रकार अग्नि तत्त्व आग के रूप में सूर्य के पास व ब्रह्माण्ड ऊर्जा ब्रह्माण्ड में चली जाती है। शरीर फिर पंचतत्त्व में विलिन हो जाता है।

पंचतत्त्व में विलिन हुए तत्त्वों की आपूर्ति

यदि शाम को गाय जमीन पर गोबर करती है तो अगले दिन उस गोबर के नीचे आपको उस जगह जमीन पर छेद देखने को मिलेंगें। ये छेद कई जीवों द्वारा गाय के गोबर को खाने वाले जीवों द्वारा बनाये जाते हैं ताकि वे भूमि से निकल कर गोबर तक आयें और उसे खायें। ये गोबर खाने वाले जीवों में मुख्यतय: गोबरैला (Dung beetle) व भूमि के केंचुए (Indian earthworm) होते हैं। इसका अर्थ है कि गाय के गोबर में इतनी आकर्षण शक्ति है कि अन्नत प्रकार के जीव-जीवाणु इसकी ओर अग्रसर होते हैं। गाय का गोबर जैसे ही भूमि पर गिरता है भूमि में समाधिस्थ (hibernating) केंचुए समाधि भंग करके इस गोबर की तरफ खिंचा चला आता है। इसका अर्थ है कि यदि केंचुओं को भूमि सुधार के कार्य पर लगाना है तो देशी गाय के गोबर का खेतों में उपयोग करना ही पड़ेगा।

गाय की व्युत्पत्ति

आज की हमारी गाय एक जंगली प्राणी के रूप में मानव निर्माण के करोड़ों वर्ष पूर्व प्रकृति में विकसित हुई है। आज हमारी देशी गाय और जर्सी, हॉलस्टीन, इन दोनों का मूल 1.5 लाख साल पहले एक ही था - बॉस जेनरा (Bos genra)। 1.5 लाख साल पहले हमारी पृथ्वी पर अकस्मात् प्राकृतिक एवं भौगोलिक घटनाएं घटी जिससे वायुमण्डल में तेजी से बदलाव आया और परिणाम स्वरूप बॉस जेनरा के शरीर में भी उसके अनुवंशीय (Genetic) रचना में अन्तगर्त बदलाव आया। परिणामरस्वरूप उसकी 3 पशुओ की व्युत्पत्ति हुई - 1. देशी गाय (Bos indicus), 2. जर्सी, हॉलस्टीन (Bos taurus), याक (Yak - Bos grunniens)। देशी गाय की व्युत्पति लगभग 110000-850000 वर्ष पहले हुई थी। उष्णकटिबंधीय देशों में अधिकांश स्वदेशी पशु जेबू प्रजाति की गाय हैं।

देशी (जेबू) गाय व विदेशी गाय में अन्तर

 

‌‌‌बाँयीं तरफ: भारतीय गाय; दाँयी तरफ: याक; बीच में: यूरोपीयन गाय 

इन तीनों में कोई भी समानता नहीं रही, तीन अलग प्राणी बन गए हैं। देशी गाय, जेबू (Zebu cattle) परिवार का प्राणी है। ‌‌‌भारतीय उपमहाद्विप की गाय व यूरोप की गायों में निम्नलिखित अन्तर देखने को मिलते हैं।

 

देशी गाय (Zebu cattle - Bos indicus)

‌‌‌विदेशी गाय (Taurine cattle - Bos taurus)

1. आकार (Conformation)

‌‌‌अगला हिस्सा चौड़ा

पुट्ठे चौड़े होते हैं

‌‌‌2. सिर ‌‌‌का ऊबार (Poll)

‌‌‌सींगों के बीच में सिर पर ऊबार होता है।

सींगों के बीच में सिर समतल होता है।

3. ‌‌‌आँखें (Eyes)

‌‌‌ऊबरी हुई नहीं होती हैं

‌‌‌ऊबरी हुई होती हैं

‌‌‌4. सिंग (Horns)

विभिन्न नस्लों में बड़े लेकिन भिन्न हैं

‌‌‌छोटे होते हैं।

5. कान

‌‌‌बड़े व लटकते हुए

‌‌‌छोटे

‌‌‌6. गलकम्बल (Dewlap)

पूरी तरह विकसित

अनुपस्थित या कम विकसित

7. ‌‌‌ढाण्ठ/कुबड़ (Hump)

पूरी तरह विकसित

अनुपस्थित या कम विकसित

8. सुण्डी (Navel flap)

पूरी तरह विकसित

अनुपस्थित या कम विकसित

9. शरीर पर बाल (Hairs over body)

कम सघन, पतले रोयेदार बाल

‌‌‌ज्यादा बाल

10. पसीने की ग्रंथियाँ (Sweat glands)

‌‌‌त्वचा में ज्यादा ग्रन्थियाँ होती हैं।

‌‌‌त्वचा में कम ग्रन्थियाँ होती हैं।

11. ‌‌‌पुंछ

लम्बी

छोटी

12. त्वचा

‌‌‌अधिक लचीलापन

‌‌‌कम लचीलापन

‌‌‌खुर

सीधे, नस्लानुसार छोटे से बड़े आकार के

‌‌‌इनमें कोई भिन्नता नहीं

‌‌‌13. स्वर तन्त्र (Vocal cord)

पूरी तरह विकसित

कम विकसित

‌‌‌14. लेवटी (Udder)

शरीर के साथ कसकर जुड़ी हुई

शरीर के साथ ढीली सी जुड़ी हुई

15. उष्णीय सहनशीलता

सहनशील है

‌‌‌अच्छी नहीं

16. आर्द्रता के प्रति सहनशील

सहनशील है

‌‌‌अच्छी नहीं

17. जीवन निर्वाह (Subsistence)

‌‌‌कम पौष्टिक चारे पर भी गुजारा कर सकती है।

‌‌‌कम पौष्टिक चारे पर भी गुजारा नहीं कर सकती

18. ‌‌‌पानी की आवश्यकता (Water intake)

‌‌‌कम पानी पीती है।

अधिक पानी की आवश्यकता होती है।

19. ‌‌‌चिचड़ी प्रतिरोधकता

‌‌‌अधिक

कम

‌‌‌20. रोग प्रतिरोधकता

‌‌‌अधिक

कम

‌‌‌21. दुग्ध केसीन (Milk casein)

टाइप 2

टाइप 1

‌‌‌22. बैठने की जगह

 ‌‌‌साफ जगह पर बैठती है।

‌‌‌कोई प्रवाह नहीं करती

23. मातृत्व (Maternity)

ममतामयी - ‌‌‌बच्चे को उससे अलग करना मुश्किल होता है।

ममतामयी नहीं है - ‌‌‌बच्चे को प्रसव के तुरन्त बाद माँ से अलग कर सकते हैं।

24. ब्यांत

8-10 बार

4-6 बार

25. ‌‌‌आंतें (Intestine)

‌‌‌लम्बी

‌‌‌कम लम्बी

26. जैविक विश्लेषण (Biological analysis)

300 ‌‌‌करोड़ से ज्यादा प्रति 1 ग्राम गोबर

‌‌‌70 लाख प्रति 1 ग्राम गोबर

 ‌‌‌-->भाग 2

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