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सिफारिशें - ज़हर-मुक्त खेती - जीवनद्रव्य, ह्यूमस

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ह्यूमस कार्बनिक पदार्थों के अपघटन का एक उत्पाद है। भूमि में मौजूद सूक्ष्मजीव में पौधों और पशु अवशेषों को अपघटित कर उन्हें सरल कार्बनिक यौगिकों में विघटित करते हैं। सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटित पदार्थ को ह्यूमस कहते हैं जिसका गहरा काला सा रंग (Dark coloured), अनियमित रूप (Amorphous), जैव पदार्थों के अवशेष (Residual organic matter) से बना हुआ जिसको और ज्यादा अपघटित नहीं किया सकता है। जब अपरदित कार्बन (पेड़-पौधों, सूक्ष्मजीवों और पशुओं के उत्सर्जित पदार्थों द्वारा उत्पन्न कार्बन) विघटनकारी जीवों (जैसे कि सूक्ष्मजीव) द्वारा भूमि में संसाधित की जाती है तो कार्बन CO2 के रूप में हवा में उड़ जाती है या विघटन करने वाले जीवों की कोशिकाओं में एकत्रित हो जाती है या फिर कार्बन पूल के रूप में प्रवेश कर जाती है। यही कार्बन पूल (Carbon pool) के भौतिक रूप में संरक्षित कार्बन सूक्ष्म जीवों द्वारा और ज्यादा विघटित नहीं होती है। यही भौतिक रूप में संरक्षित कार्बन (Physically protected carbon) भूमि के सरंचनात्क विशेषताओं से सम्बंध रखती है। जिसमें रासायनिक रूप से सरंक्षित जैव पदार्थ भूमि में रासायनिक प्रक्रियाओं से सम्बंधित होता है और इसी भूमि में मौजूद रासायनिक रूप से सरंक्षित जैव पदार्थ को भूमि का ह्यूमस या जीवनद्रव्य कहा जाता है। जैव पदार्थों का छोटे-छोटे टुकड़ों में टुटना (Shredding) ह्यूमस की उत्पत्ति के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है और यह कार्य भूमि में उपस्थित मृतभक्षी जीव (Saprophagus fauna) जैसे के केंचुआ (Earthworm), सहस्त्रपादी (Millipedes), घोंघे (Snails), एनकीट्रीया (Enchytraeid) इत्यादि करते हैं। इसके बाद सूक्ष्मजीव इन छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित अवशेषों को विघटित कर ह्यूमस का निमार्ण करते हैं। वैज्ञानिक शोधों में यह पाया गया कि 90 प्रतिशत जैव अवशेषों के संसाधन का कार्य केवल केंचुआ (Earthworm) और एनकीट्रीया (Enchytraeid) जन्तुओं द्वारा ही किया जाता है।

‌‌‌‌‌‌ह्यूमस निर्माण को प्रभावित करने वाले कारक

·         ‌‌‌पर्यायवरण का तापमान और आर्द्रता

·         मृदा जीवों एवं सूक्ष्मजीवों की गतिविधियाँ और सरंचना

·         ‌‌‌अपशिष्ट की गुणवत्ता

·         वायु संचारण

·         अपघटन की दर

ह्यूमस की निर्माण फसलीय अवशेषों की मात्रा और प्रकृति, मिट्टी में उनके डालने के तरीका तथा उनके अपघटन की प्रकृति पर निर्भर करता है। मृदा में अवशिष्ट ह्यूमस का मुख्य स्त्रोत है और कार्बनिक पदार्थ लीचेट्स के रूप में अवशिष्ट से भूमि में प्रवेश करते हैं। ह्यूमस की मात्रा का निर्माण घास वर्गीय पौधों की अपेक्षा कठोर तनों वाले पौधों में कम होता है क्योंकि कठोर वर्गीय पौधों की लकड़ी मोटी और ज्यादा समय तक रहने वाली होती है। स्थानीय सूक्ष्म पर्यायवरण संबन्धी परिस्थितियाँ अपघटन दर के अच्छे अनुमानक हैं क्योंकि उनमें तापमान या वास्तविक वाष्पोत्सर्जन और फसलीय अवशेषों के अपघटन में अच्छा सम्बंध होता है। तापमान सीधे तौर पर कुछ हद तक ह्यूमस बनाने की दर से आनुपातिक होता है क्योंकि तापमान में वृद्धि दर बढ़ने से ह्यूमस की निर्मिती बढ़ जाती है। मृदा में अच्छा वायु संचारण और आर्द्रता की मात्रा भी ह्यूमस निर्मिती की प्रक्रिया को उत्तेजित करते हैं। अवशेषों की रासायनिक प्रकृति शायद सबसे महत्वपूर्ण कारक है जो कि ह्यूमस निर्मिती के अनुपात को प्रभावित करती है। सूक्ष्मजीवों की उपलब्धता और उनकी गतिविधि की सीमा अधिकतम हद तक ह्यूमस निर्मिती की प्रक्रिया को प्रभावित करती है, क्योंकि ये प्रक्रिया के मुख्य संचालक हैं। विभिन्न जैव रासायनिक क्रियाओं के परिणामस्वरूप जीवाणुओं की संयुक्त गतिविधियों के माध्यम से पौधों के अवशेष ह्यूमस में बदल जाते हैं।

‌‌‌ह्यूमस निर्माण का भूमि में योगदान

·         ‌‌‌भूमि को उपजाऊ बनाता है। पौधों और सूक्ष्माजीवों को पोषक तत्त्व प्रदान करता है। पूर्ण विघटन के उपरान्त पौधों विभिन्न अवस्थाओं में खनिज पदार्थों की उपलब्द्धता बढ़ाता है। कई प्रकार के कार्बनिक अम्ल (Carbonic acids) बनाता है जो भूमि में मृदा सामग्री के विलयकों (Solvents) के रूप में कार्य करते हैं।

·         ‌‌‌ह्यूमस की छिद्रपूर्ण (Porous) अवस्था होने के कारण यह भूमि के जल प्रतिधारण (Water retention) क्षमता में वृद्धि करता है। यह रेत के कणों को जोड़कर या आपस में बांध (bind) कर सुद्ढ़कारक (Cementing agent) का कार्य करता है और साथ ही पौधों की पोषक तत्त्व वृद्धि दर को बढ़ाता है।

·         ‌‌‌भूमि में अनुकुलतम ह्यूमस निर्माण कृषि विज्ञान सम्बंधी बहुमूल्य सरंचना को सुदृढ़ एवं जल व हवा की अनुकूल व्यवस्था करता है और भूमि की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है।

·         यह पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) में ऊर्जा के साथ-साथ भौतिक संचलन (Material circulation) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

‌‌‌ह्यूमस की प्रकृति और विशेषताएं

ह्यूमस पानी में अघुलनशील (Insoluble) है यह कार्बनिक श्लैष तंतुओं (organic colloids) के रूप में मिट्टी में विद्यमान होता है। श्लैष तंतु प्रकृति (Colloidal nature) और अन्य मुख्य विशेषताएं, जो कि भूमि के महत्वपूर्ण अंग हैं, इस प्रकार हैं:

1.    यह रंग काला है जो इसे भूमि के अन्य श्लैष घटकों (Colloidal constituents) से अलग करता है।

2.    छोटे-छोटे श्लैष ह्यूमस (Colloidal humus) के कण (Micelles) लिग्निन (Lignin), पॉलीउरोनोइड्स (Polyuronides) और पॉलीसेकेराइड्स (Polysaccarides) के रूप में कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बने होते हैं।

3.    ‌‌‌ह्यूमस श्लैष कणों (Humus colloidal particles) का क्षेत्र, सिलिकेट मृदा के कणों से बहुत अधिक होता है।

4.    ‌‌‌ह्यूमस के कण ऋणात्मक आवेशित (Negatively charged) होते हैं जो (ऋणात्मक आवेश) मृदा की पीएच (pH) के साथ-साथ बढ़ता है।

5.    उच्च पीएच (pH) पर, ‌‌‌ह्यूमस में सिलिकेट कणों से ज्यादा धनात्मक विनिमय (Cation exchange) होता है।

6.    ह्यूमूस में उच्च जल धारण (Water retention) क्षमता है।

7.    ‌‌‌ह्यूमस में कम लचीलापन (Elasticity) और सशक्तिबधता (Cohesion) है, जो समग्रता (Aggregation) और स्थिरता (Stability) के लिए बहुत ही अनुकूलीय है।

8.    ‌‌‌ह्यूमस में मौजूद तत्त्व प्रकाशीय प्रतिकारत्मक गुण (Optical response characteristics) होते हैं।

 

ß (विषय-सूचि पर जाएं)

गेहूँ की खेती; धान की खेती; सब्जियों की खेती; कपास ‌‌‌एवं ‌‌‌सब्जियों की खेती; गन्ने की खेती; आलू एवं सरसों की ‌‌‌खेती; अरहर, हल्दी ‌‌‌एवं मिर्च की खेती; पंचस्तरीय बागवानी; जीवामृत; घनजीवामृत; बीजामृत; सप्त-धान्यांकुर; नीमास्त्र; अग्नि-अस्त्र; ब्रह्मास्त्र; दशपर्णी अर्क; फफूंदनाशक (फंगीसाइड); आच्छादन; ‌‌‌जीवनद्रव्य, ह्यूमस; वाफसा और वृक्षाकार प्रबन्धन; सूक्ष्म पर्यावरण; पद्मश्री सुभाष पालेकर जी; अन्तिम पृष्ठ

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