Home | Poison Free Agriculture Farming | सिफारिशें - ज़हर-मुक्त खेती - फफूंदनाशक (फंगीसाइड)

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सिफारिशें - ज़हर-मुक्त खेती - फफूंदनाशक (फंगीसाइड)

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इसका उपयोग फफूंद को नियन्त्रित करने के लिए उपयोग किया जाता है।

घटक

पानी                 100 लीटर

खट्टी लस्सी         3 लीटर

विशेष: यह विषाणु (वायरस) नाशक भी है।

 

‌‌‌सोंठास्त्र

घटक

सूखी सोंठ                      200 ग्राम

देशी गाय का दूध            5 लीटर

पानी                             200 लीटर

‌‌‌विधि

सूखी सोंठ को कूट कर पाउडर बना लें। फिर इसको 2 लीटर ‌‌‌पानी में मिलाकर तब तक उबालें। एक लीटर शेष रहने पर इसको ठण्डा कर लें।

एक अन्य बर्तन में देशी गाय के 5 लीटर दूध को एक बार उबाल कर ठण्डा होने दें। इस दूध की मलाई को उतार कर घरेलू उपयोग कर लें।

सोंठ युक्त दूध व उबले हुए दूध को कपड़े की सहायता से छान कर 200 लीटर पानी में मिला लें व इसका छिड़काव एक एकड़ की फसल पर करें।

‌‌‌नीम मलहम

‌‌‌सामग्री

पानी

50 लीटर

गौ-मूत्र

20 लीटर

देशी गाय का ताजा गोबर

20 किलोग्राम

नीम (Neem) की चटनी या निम्बोली

10 किलोग्राम

‌‌‌पहले पानी में गौ-मूत्र डालकर मिला लें।

फिर इसमें देशी गाय का ताजा गोबर डाल करलकड़ी की डण्डी से अच्छी प्रकार मिलाएं।

अब इसमें नीम की चटनी या निम्बोली का पाउडर डाल कर मिला लें।

48 घण्टे छाया में रखें। दिन में 2 बार सुबह-शाम 1 मिनट के लिए घोलें। धूप और वर्षा से बचाएं। ‌‌‌48 घण्टे के बाद वर्ष में 4 बार तने पर लगाना है।

 

ß (विषय-सूचि पर जाएं)

गेहूँ की खेती; धान की खेती; सब्जियों की खेती; कपास ‌‌‌एवं ‌‌‌सब्जियों की खेती; गन्ने की खेती; आलू एवं सरसों की ‌‌‌खेती; अरहर, हल्दी ‌‌‌एवं मिर्च की खेती; पंचस्तरीय बागवानी; जीवामृत; घनजीवामृत; बीजामृत; सप्त-धान्यांकुर; नीमास्त्र; अग्नि-अस्त्र; ब्रह्मास्त्र; दशपर्णी अर्क; फफूंदनाशक (फंगीसाइड); आच्छादन; ‌‌‌जीवनद्रव्य, ह्यूमस; वाफसा और वृक्षाकार प्रबन्धन; सूक्ष्म पर्यावरण; पद्मश्री सुभाष पालेकर जी; अन्तिम पृष्ठ

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