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सिफारिशें - ज़हर-मुक्त खेती - जीवामृत कैसे बनाएं?

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(‌‌‌एक एकड़ के लिए)

‌‌‌1. पानी

200 लीटर

2. देशी गाय का गोबर

10.0 किलो ग्राम

3. देशी गाय का मूत्र

5-10 लीटर

4. गुड़

1.0-1.5 किलो ग्राम

5. बेसन

1.0-1.5 किलो ग्राम

6. ‌‌‌खेत या मेढ़ की मिट्टी

1.0 मुट्ठी

‌‌‌इन सभी का एक टंकी में घोल बनाएं। इस घोल को घड़ी की सुई की दिशा में 2-3 मिनट तक घोलें।

इस ‌‌‌टंकी को बोरी से ढक कर 72 घण्टे तक छाँव में रख दें।

सुबह-शाम दो-दो मिनट घोलें।

इस घोल का उपयोग 7 दिन के अन्दर-अन्दर करें।

विशेष - 1. ‌‌‌‌‌‌केवल गाय का गोबर उपयोग ‌‌‌करें।

2. ‌‌‌यदि आपके पास ‌‌‌बैल है तो आधा गोबर ‌‌‌बैल का मिला सकते ‌‌‌हैं लेकिन ‌‌‌अकेले बैल का गोबर नहीं ‌‌‌होना चाहिए। भैंस और जसी, होल्स्टीन का मूत्र वर्जित है।

3. ‌‌‌गोबर जितना ताजा होगा उतना ही अच्छा होगा।

4. ‌‌‌गोबर 7 दिन तक का प्रभावशाली होता है।

5. ‌‌‌गौ-मूत्र जितना पुराना होगा उतना ही लाभकारी होगा।

6. ‌‌‌जो गाय जितना ज्यादा दूध देती है उसका गोबर व मूत्र उतना ही कम प्रभावशाली होता है।

7. ‌‌‌इसलिए इसको तैयार करने के लिए हमारी देशी गाय सबसे अच्छी होती है।

 

ß (विषय-सूचि पर जाएं) 

गेहूँ की खेती; धान की खेती; सब्जियों की खेती; कपास ‌‌‌एवं ‌‌‌सब्जियों की खेती; गन्ने की खेती; आलू एवं सरसों की ‌‌‌खेती; अरहर, हल्दी ‌‌‌एवं मिर्च की खेती; पंचस्तरीय बागवानी; जीवामृत; घनजीवामृत; बीजामृत; सप्त-धान्यांकुर; नीमास्त्र; अग्नि-अस्त्र; ब्रह्मास्त्र; दशपर्णी अर्क; फफूंदनाशक (फंगीसाइड); आच्छादन; ‌‌‌जीवनद्रव्य, ह्यूमस; वाफसा और वृक्षाकार प्रबन्धन; सूक्ष्म पर्यावरण; पद्मश्री सुभाष पालेकर जी; अन्तिम पृष्ठ

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