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सिफारिशें - ज़हर-मुक्त खेती - आलू एवं सरसों की खेती

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बीज की किस्में: ‌‌‌सभी देशी ‌‌‌या संकर किस्में।

‌‌‌खेत की तैयारी: प्रति एकड़ 400 किलोग्राम घन-जीवामृत छिड़क कर अन्तिम जुताई से मिट्टी में मिला दें। ‌‌‌अंकुरित खरपतवार को मिट्टी में मिला दें।

बुवाई की विधि: ‌‌‌आलू: पारम्पारिक विधि से ही आलू बोएं। आलू के ‌‌‌बीज की बीजाई दो फुट की दूरी ‌‌‌पर की जाती है। इसकी बीजाई के लिए बीज-से-बीज की दूरी एक फुट रखें।

सह-फसलें: आलू अंकुरित होने के बाद 9 x 9 फुट पर सरसों के 2-2 दाने लगाएं। ‌‌‌सरसों के नीचे दोनों ओर चने के दो-दो बीज बीजामृत का संस्कार करके लगाएं।

 

प्रबन्धन: महीने में 2 बार पानी के साथ प्रति एकड़ 200 लीटर जीवामृत दें। ‌‌‌इसके बाद ‌‌‌छिड़काव की समय सारणी इस प्रकार रखें:

‌‌‌क्रम

‌‌‌समय

‌‌‌मात्रा (प्रति एकड़)

1

‌‌‌बीज बुआई/रोपाई के 1 माह बाद

‌‌‌100 लीटर पानी + 5 लीटर कपड़े से छाना हुआ जीवामृत

2

‌‌‌पहले छिड़काव के 15 दिन बाद

‌‌‌100 लीटर नीमास्त्र अथवा

100लीटर पानी + 3 लीटर दशपर्णी अर्क

3

‌‌‌दूसरे छिड़काव के 15 दिन बाद

‌‌‌100 लीटर पानी + 2.5 लीटर खट्टी लस्सी (3 दिन पुरानी)

4

‌‌‌तीसरे छिड़काव के 15 दिन बाद

‌‌‌150 लीटर पानी +10 लीटर कपड़े से छाना हुआ जीवामृत

5

‌‌‌चौथे छिड़काव के 15 दिन बाद

‌‌‌150 लीटर पानी + 5 लीटर ब्रह्मास्त्र अथवा

150 लीटर पानी + 5-6 लीटर दशपर्णी अर्क

6

‌‌‌पाँचवे छिड़काव के 15 दिन बाद

‌‌‌150 लीटर पानी + 4.5 लीटर खट्टी लस्सी (3 दिन पुरानी)

7

‌‌‌छटे छिड़काव के 15 दिन बाद

200 लीटर पानी + 20 लीटर कपड़े से छाना हुआ जीवामृत

8

‌‌‌सातवें छिड़काव के 15 दिन बाद

200 लीटर पानी + 6 लीटर अग्नि-अस्त्र अथवा

200 लीटर पानी + 6-8 लीटर दशपर्णी अर्क

9

‌‌‌आठवें छिड़काव के 15 दिन बाद

200 लीटर पानी + 6 लीटर खट्टी लस्सी (3 दिन पुरानी)

10

‌‌‌जब ‌‌‌आलू कुल आकार का 50% होगा तब

‌‌‌200 लीटर सप्तधान्यांकुर अर्क अथवा

200 लीटर पानी + 6 लीटर खट्टी लस्सी (3 दिन पुरानी)

 

 ß (विषय-सूचि पर जाएं)

गेहूँ की खेती; धान की खेती; सब्जियों की खेती; कपास ‌‌‌एवं ‌‌‌सब्जियों की खेती; गन्ने की खेती; आलू एवं सरसों की ‌‌‌खेती; अरहर, हल्दी ‌‌‌एवं मिर्च की खेती; पंचस्तरीय बागवानी; जीवामृत; घनजीवामृत; बीजामृत; सप्त-धान्यांकुर; नीमास्त्र; अग्नि-अस्त्र; ब्रह्मास्त्र; दशपर्णी अर्क; फफूंदनाशक (फंगीसाइड); आच्छादन; ‌‌‌जीवनद्रव्य, ह्यूमस; वाफसा और वृक्षाकार प्रबन्धन; सूक्ष्म पर्यावरण; पद्मश्री सुभाष पालेकर जी; अन्तिम पृष्ठ

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