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सिफारिशें - ज़हर-मुक्त खेती - गन्ने की खेती

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बुवाई का समय: 10 अगस्त से 10 नवम्बर तक।

‌‌‌बीज का चयन: 8-9 महीने पूराने खेत का गन्ना।

‌‌‌गन्ने की आँख का चयन: गन्ने की पोरी के पीछे का चौड़ा भाग 2/3 और आँख के सामने का भाग 1/3 होना चाहिए।

‌‌‌गन्ने के बीज की मात्रा: 171 गन्ने या 2.5 क्विंटल बीज।

‌‌‌गन्ने के बीज की किस्में: सी.ओ.जे.-85, सी.ओ.-118, सी.ओ.-88, सी.ओ.-238, सी.ओ.एच.-160 एवं अन्य किस्में।

‌‌‌गन्ना लगाने से पहले की तैयारी: गन्ने की फसल लेने से पहले दलहनी फसल लें।

बुवाई की विधि: ‌‌‌अन्तिम जुताई से ‌‌‌पहले 400 किलो ग्राम घन-जीवामृत प्रति एकड़ कृषि भूमि में ‌‌‌डालकर‌‌‌ जुताई करके अच्छी प्रकार मिला दें।‌‌‌ 3 फुट की दूरी पर 1.5 फुट चौड़ी व 1 फुट गहरी पानी की नालियाँ बनाएं। 4½ फुट x 2 फुट की दूरी पर कतारों में गन्ना लगाएं। गन्ने की आँखों ‌‌‌का बीजामृत के साथ बीजोपचार करें।

सह-फसलें: तैयार बैड पर सहफसलों (उड़द, मूँग, चना, या मटर लगाएं व दूसरी ओर तिलहन, मूँगफली, या सरसों ‌‌‌व सभी मौसमी सब्जियाँ) की बीजाई करें। ‌‌‌सहफसलों को भी बीजामृत के साथ बीजोपचारित करें।

प्रबन्धन: ‌‌‌गन्ना बुवाई करने के उपरान्त तीन महीने तक ‌‌‌21 दिन के अन्तराल पर, हर नाली में पानी देने के साथ-साथ ‌‌‌200 लीटर जीवामृत देना है। ‌‌‌आवश्यकतानुसार फसल सुरक्षा औषधियों ‌‌‌जैसे कि निमास्त्र, ‌‌‌ब्रह्मास्त्र, ‌‌‌अग्नि-अस्त्र, दशपर्णी अर्क, थ्रिप्सनाशी, फफूंदनाशी, ‌‌‌सप्तधान्यांकुर अर्क, ‌‌‌सोंठास्त्र का उपयेग करें।

‌‌‌छिड़काव की समय सारणी (गन्ना):

‌‌‌छिड़काव क्रम

समय

मात्रा (प्रति एकड़)

1

‌‌‌गन्ना लगाने के 1 माह बाद

100 लीटर पानी + 5 लीटर कपड़े से छाना हुआ जीवामृत

2

पहले छिड़काव के 21 दिन बाद

150 लीटर पानी + 10 लीटर कपड़े से छाना हुआ जीवामृत

3

दूसरे छिड़काव के 21 दिन बाद

200 लीटर पानी + 20 लीटर कपड़े से छाना हुआ जीवामृत

4

तीसरे छिड़काव के 21 दिन बाद

200 लीटर पानी + 5 लीटर खट्टी लस्सी (3 दिन पुरानी)

5

चौथे छिड़काव के 21 दिन बाद

200 लीटर पानी + 20 लीटर कपड़े से छाना हुआ जीवामृत

6

पाँचवे छिड़काव के 21 दिन बाद

200 लीटर पानी + 20 लीटर कपड़े से छाना हुआ जीवामृत

 

ß (विषय-सूचि पर जाएं) 

गेहूँ की खेती; धान की खेती; सब्जियों की खेती; कपास ‌‌‌एवं ‌‌‌सब्जियों की खेती; गन्ने की खेती; आलू एवं सरसों की ‌‌‌खेती; अरहर, हल्दी ‌‌‌एवं मिर्च की खेती; पंचस्तरीय बागवानी; जीवामृत; घनजीवामृत; बीजामृत; सप्त-धान्यांकुर; नीमास्त्र; अग्नि-अस्त्र; ब्रह्मास्त्र; दशपर्णी अर्क; फफूंदनाशक (फंगीसाइड); आच्छादन; ‌‌‌जीवनद्रव्य, ह्यूमस; वाफसा और वृक्षाकार प्रबन्धन; सूक्ष्म पर्यावरण; पद्मश्री सुभाष पालेकर जी; अन्तिम पृष्ठ

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