Home | Festivals | नवरात्र | नवरात्रि की प्रामाणिक कथाएं

Sections

Newsletter
Email:
Poll: Like Our New Look?
Do you like our new look & feel?

नवरात्रि की प्रामाणिक कथाएं

Font size: Decrease font Enlarge font

नवरात्रि से संबंधित कर्इ कथाएं प्रचलन में हैं, जो इस प्रकार हैं:

1. एक पौराणिक कथा के अनुसार नवरात्रि में माँ दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षक का वध करके देवताओं को उनके कष्टों से मुक्त किया था।

महिषासुर ने भगवान शिव की आराधना करके अद्वितीय शक्तियां प्राप्त कर ली थी और तीनों देव अर्थात ब्रह्मा, विष्णु और महेष भी उसे हराने में असमर्थ थे। महिषासुर राक्षस के आंतक से सभी देवता भयभीत थे। उस समय सभी देवताओं ने अपनी-अपनी शक्तियों को मिलाकर दुर्गा को अवतरित किया। अनेक शक्तियों के तेज से जन्मी दुर्गा माता ने महिषासुर का वध करके सबके कष्टों को दूर किया था।

2. एक अन्य कथा के अनसार, एक नगर में एक ब्राहमण रहता था। वह माँ भगवती दुर्गा का परम भक्त था। उसकी एक कन्या थी। ब्राहमण नियपूर्वक प्रतिदिन दुर्गा माँ की पूजा करता था और यज्ञ किया करता था। सुमति अर्थात ब्राहमण की बेटी भी प्रतिदिन इस पुजा में भाग लिया करती थी। एक दिन सुमति खेलने में व्यस्त होने के कारण भगवती पूजा में शामिल नही सकी। यह देख उसके पिता को क्रोध आ गया और क्रोधवश उसके पिता ने कहा कि वह उसका विवाह किसी दरिद्र और कोढ़ी से करेगा।

पिता की बातें सुनकर बेटी को बड़ा दुख हुआ और उसने पिता के द्वारा क्रोध में कही गर्इ बातों को सहर्ष स्वीकार कर लिया। कर्इ बार प्रयास करने से भी भाग्य का लिखा हुआ नहीं बदलता है। अपनी बात के अनुसार उसके पिता ने अपनी कन्या का विवाह एक कोढ़ी के साथ कर दिया। सुमति अपने पति के साथ विवाह कर चली गर्इ। उसके पति का घर न होने के कारण उसे वन में घास के आसन पर रात बड़े कष्ट में बितानी पड़ी।

गरीब कन्या की यह दशा देखकर माता भगवती उसके द्वारा पिछले जन्म में की गर्इ उसके पुण्य प्रभाव से प्रकट हुर्इ और सुमति से बोली ‘हे कन्या मैं तुम पर प्रसन्न हूं’ मैं तुम्हे कुछ देना चाहती हूं, मांगो क्या मांगती हो।

इस पर सुमति ने उनसे पूछा कि आप मेरी किस बात पर प्रसन्न हैं? कन्या की यह बात सुनकर देवी कहने लगी - मैं तुम पर पूर्व जन्म के तुम्हारे पुण्य के प्रभाव से प्रसन्न हूं, तुम पूर्व जन्म में भील की पतिव्रता स्त्री थी।

एक दिन तुम्हारे पति भी द्वारा चोरी करने के कारण तुम दोनों को सिपाहियों ने पकड़ कर जेलखाने में कैद कर दिया था। उन लोगों ने तुम्हे और तुम्हारे पति को भोजन भी नही दिया था। इस प्रकार नवरात्र के नौ दिनों में तुमने न तो कुछ खाया और न ही जल पिया, इसलिए नौ दिन तक नवरात्र व्रत का फल तुम्हे प्राप्त हुआ।

हे ब्राहमणी, उन दिनों अनजाने में जो हुआ, उस व्रत के प्रभाव से प्रसन्न होकर आज मैं तुम्हे मनावांछित वरदान दे रही हूं। कन्या बोली अगर आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो कृपा करके मेरे पति का कोढ़ दूर कर दीजिये। माता ने कन्या की यह इच्छा शीघ्र पूरी कर दी। उसके पति का शरीर माता भगवती की कृपा से रोगहीन हो गया।

3. रामायण के एक प्रसंग के अनुसार भगवान श्री राम, लक्ष्मण, हनुमान व समस्त वानर सेना द्वारा आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक (शारदीय नवरात्रि) नौ दिनों तक माता शक्ति की उपासना की और उसके बाद दसवें दिन लंका विजय के लिए प्रस्थान किया और विजय प्राप्त की। तब से असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म की जीत का पर्व दशहरा मनाया जाने लगा। नवरात्रि के नौ दिनों में आदिशक्ति माँ दुर्गा के उन नौ स्वरूपों का भी पूजन किया जाता है जिन्होने सृष्टि के आरम्भ से लेकर अभी तक इस पृथ्वी लोक पर विभिन्न लीलाएं की थीं। माँ के इन नौ स्वरूपों को नवदुर्गा के नाम से जाना जाता है।

4. एक लौक कथा के अनुसार कहा जाता है कि दैत्य गुरू शुक्राचार्य के कहने पर दैत्यों ने घोर तपस्या कर ब्रह्मा जी को प्रसन्न किया और वर मांगा कि उन्हे कोर्इ पुरूष, जानवर और उनके शस्त्र न मार सकें।

वरदान मिलते ही असुर अत्याचार करने लगे, तब देवताओं की रक्षा के लिए ब्रह्मा जी ने वरदान का भेद बताते हुए बताया कि असुरों का नाश अब स्त्री ही कर सकती है। ब्रह्मा जी के निर्देश पर देवों ने नौ दिनों तक माँ पार्वति को प्रसन्न किया और उनसे असुरों के संहार का वचन लिया। असुरों के संहार के लिए देवी ने दौद्र रूप धारणस किया थ इसीलिए शादरीय नवरात्र शक्ति-पर्व के रूप में मनाया जाता है।

5. एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नौ दिनों तक देवी के आह्वान पर असुरों के संहार के लिए माँ पार्वति ने अपने अंश से नौ रूप उत्पन्न किए। सभी देवताओं ने उन्हे अपने शस्त्र देकर शक्ति संपन्न किया। इसके बाद देवी ने असुरों का अन्त किया। यह संपूर्ण घटनाक्रम चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नौ दिनों तक घटित हुआ इसलिए चैत्र नवरात्र मनाए जाते हैं।

Tags
No tags for this article
Rate this article
5.00