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सीढ़ीयाँ

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भूमिगत पानी के साधन के बाद, किसी भी घर में सीढ़ीयाँ दूसरा महत्त्वपूर्ण पहलू है जो जिन्दगी में अचानक बदलाव का कारण बनता है। सीढ़ीयों में भार होता है व मोमटी बनने से सीढ़ीयों की ऊँचाई भी बढ़ जाती है।

सीढ़ीयों के नीचे कभी भी भूलकर भी, कुछ न बनाएं। अगर बनाना है तो आप एक स्टोर बना सकते हैं लेकिन वह भी ​बिना दरवाजे का। अगर दरवाजा लगाना है तो वह जालीदार हो ताकि उसमें हवा आर-पार हो सके। यदि आप सीढ़ीयों के नीचे शौचघर, रसोई, मन्दिर या दरवाजे वाला स्टोर बनाते हैं तो घर में हमेशा उदासी रहेगी, घर में लड़के या लड़की की शादी में अड़चन आयेगी, घर का मुखिया मानसिक सन्तुलन खो बैठेगा, जिन्दगी में सब-कुछ होते हुये भी उसकी जिन्दगी में निराशा बनी रहेगी।

सीढ़ीयाँ घड़ी की सुई की तरह घूमती हैं या विपरीत है घूमती हैं इससे कोई फर्क नही पड़ता है। फर्क जो पड़ता है तो वह है उनकी घर में स्थिती। सीढ़ीयाँ हमेशा ही विषम संख्या में होनी चाहिए। लेकिन इससे से भी महत्त्वपूर्ण है घर में उनकी स्थिती है।

1. उत्तर: आपके भवन के उत्तर में सीढ़ीयाँ अच्छी नही हैं। इससे व्यापार में घाटा नजर आयेगा। व्यापार में आपकी उधारी आएगी जरूर लेकिन टूट-टूट कर आएगी। आपको बहाने सुनने को मिलेंगे कि कल दे दूँगा, परसों दे दूँगा, जितने मेरे पास रख लिजिएगा। आप देखते हैं कि मेरे पास धन है लेकिन बरकत नही है।

यदि आप नौकरी करते हैं तो आपकी नौकरी में स्थिरता नही आएगी। आए दिन आपको नौकरी बदलनी पड़ सकती है।

उत्तर दिशा में सीढ़ीयाँ होने से स्वास्थय हानि हो सकती है जैसे कि टाँगों से कंधों तक दर्द, सिर में दर्द, गर्दन में दर्द, कमर में दर्द हो सकता है।

2. उत्तर-पूर्व: उत्तर-पूर्व में सीढ़ीयाँ सबसे ज्यादा घातक होती हैं। उत्तर-पूर्व में सीढ़ीयाँ होने से सुख-समृधि समाप्त, दिवालियापन होगा। ऐसी-ऐसी अड़चने जिन्दगी में आएगी जिनके बारे में आपने कभी सोचा भी नही होगा जैसे कि व्यापार समाप्त, घर के मुखिया की अकाल मृत्यु हो सकती है। व्यापार में घाटा होगा। कर्जा आपको देखने को मिलेगा। दिवालियापन देखने को मिलेगा। व्यवसाय चल नही सकता।

घर की महिलाओं को स्वास्थय सम्बन्धि समस्याएं खासतौर पर सिर से सम्बन्धित समस्याएं। घर के अन्दर मानसिक तनाव रहेगा, पुत्र रत्न की प्राप्ति की सम्भावना लगभग समाप्त, गर्भवती महिलाओं में बार-बार गर्भपात, गर्भधारण की समस्या हो जाएगी। घर का पैसा बीमारीयों पर खर्च होगा।

घर में बच्चों की शिक्षा, स्वास्थय, मानसिक व शारीरिक विकास में बाधा उत्पन्न हो जाएगी।

3. पूर्व: पूर्व दिशा में भी सीढ़ीयाँ बहुत-बहुत खराब होती हैं। पूर्व दिशा में सीढ़ीयाँ होने से घर के मुखिया की सामाजिक प्रतिष्ठा समाप्त, बैठे-बैठाए कलंकित हो जाएगी। बच्चों की शिक्षा 100 प्रतिशत प्रभावित हो जाएगी। स्वास्थय सम्बन्धि समस्याएं खासकर शरीर के उपरी हिस्सों - कंधों से लेकर सिर तक देखने को मिलेंगी। घर के मुखिया को सिर दर्द, ब्लड प्रैशर, जीगर की बीमारी व अन्य अवरोधक आएंगे। आपके परिवार की ऐसी हालत हो सकती है जैसे कि शरीर से आत्मा खींच ली गई हो, सांस चल रही है, परिवार चल रहा है लेकिन खुशियाँ रूठ गई हों आपकी।

4. दक्षिण-पूर्व: दक्षिण-पूर्व में सीढ़ीयाँ निश्क्रिय (neutral) सी होती हैं लेकिन आर्दष नही हैं। यदि आप दक्षिण-पूर्व में सीढ़ीयाँ बनाना चाहते हैं तो ध्यान रहे कि ये सीढ़ीयाँ दक्षिण-पूर्व में ही घूमें न कि पूर्व को छूएं, नही तो यही सीढ़ीयाँ पूर्व की दिशा की सीढ़ीयों जैसा प्रभाव देंगी। दक्षिण-पूर्व में सीढ़ीयाँ होने से थोड़ी सी स्वास्थय में हानि खासकर बड़ी उम्र की महिलाओं को दायें हाथ में दर्द हो सकता है।

5. दक्षिण: दक्षिण में सीढ़ीयाँ बहुत अच्छी होती हैं। यह नम्बर दो की उपयुक्त स्थिती है क्योंकि यहाँ पृथ्वी तत्व है तो भार व ऊँचाई ले सकता है।

6. दक्षिण-पश्चिम: दक्षिण-पूर्व सीढ़ीयों के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है। यह नम्बर एक स्थिती है। यहाँ पर पृथ्वी तत्व है जो भार व ऊँचाई ले सकता है।

7. पश्चिम: पश्चिम में भी बहुत ठीक हैं। यह नम्बर तीन की स्थिती है। यह भार व ऊँचाई ले सकती है क्योंकि यह वास्तुपुरूष की रीढ़ की हड्डी होती है।

8. उत्तर-पश्चिम: उत्तर-पश्चिम में सीढ़ीयाँ निष्क्रिय (neutral) सी होती हैं लेकिन यहाँ पर भी सीढ़ीयाँ आर्दश नही हैं। यदि सीढ़ीयाँ उत्तर की दिशा को छू कर जाती हैं तो खराब हो सकती हैं जैसे कि धन व जीविका (Career) में नुकसान हो सकता है। नौकर-पेशे में अस्थिरता हो सकती है।

9. केन्द्र: केन्द्र में सीढ़ीयाँ महाघातक हो सकती हैं। केन्द्र में सीढ़ीयाँ होने से सुख-समृधि की समाप्ति, घर के मुखिया की अकाल मृत्यु की प्रबल सम्भावना। घर का मुखिया बिस्तर में या स्वर्ग में होगा।

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