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प्रार्थना

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अभ्यास के लाभ में अधिक वृद्धि के लिए योग अभ्यास प्रार्थना के मनोभाव के साथ शुरू करना चाहिए।

ऊँ संगच्छध्वं संवदध्वं

सं वो मनांसि जानताम्

देवा भागं यथा पूर्वे

सञ्जानाना उपासते।।

अर्थात हम सब साथ गमन करें, हम सब साथ एक सुर में बोलें, हम सब साथ अपने मन को समचित्त बनाएं, जैसा कि पूर्व में था, आइए र्इश्वरत्व को अपनी एपासना में झलकने दें।

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