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मशरूम: पोषक तत्वों से भरपूर

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आदित्य*, जे.एन. भाटिया** एवं सरोज बाला दहिया***

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* B.Sc. (Hons.) Agri. (pursuing), Sher-e-Kashmir University of Agriculture and Technology, Jammu & Kashmir (India)

** Professor (Plant Pathology), CCS HAU KVK Kurukshetra, Haryana

*** Kurukshetra Global City, Kurukshetra, Haryana - 136118

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मशरूम की खेती एवं खाद्य पदार्थों के विश्लेषण से ज्ञात होता है कि पोषक तत्वों की प्रचुरता के दृष्टिकोण से मशरूम में पोषक तत्व अधिकांश सब्जियों की तुलना में अधिक पाये जाते हैं (Gupta 2014)। मशरूम में उच्च गुणवत्ता की प्रोटीन, भरपूर मात्रा में खनिज पदार्थ एवं विटामिन होते हैं (राणा 2007, Marshall and Nair 2009)। मशरूम का आहारीय सेवन व विभिन्न बीमारियों का निदान करता है। इसके अलावा यह कृषि अवशेष का विघटन करके प्रदूषण को दूर करता है। मशरूम को कृत्रिम रूप से बिना खेत व रोशनी के कमरों में सालभर उगाया जा सकता है। इसकी बढ़ती हुई माँग व उपयोगिता को देखते हुये इसका व्यापक स्तर पर उत्पादन सम्भव है। पिछड़े क्षेत्रों में इसकी खेती करने से हजारों परिवारों को रोजगार मिलता है। 100 ग्राम ताजा मशरूम में निम्नलिखित तत्व पाए जाते हैं (राणा 2007):

प्रोटीन

3.1 ग्राम

वसा

0.8 ग्राम

कार्बोहीड्रेट्स

4.3 ग्राम

रेशे

0.8 ग्राम

ऊर्जा

43 कैलोरी

कैल्शियम

6 मि.ग्रा.

फास्फोरस

110 मि.ग्रा.

लोहा

1.5 ग्राम

थायमिन

0.14 मि.ग्रा.

राइबोफ्लेविन

0.15 मि.ग्रा.

नायसिन

2.4 मि.ग्रा.

विटामिन सी

12 मि.ग्रा.

फोलिक एसिड

24 मि.ग्रा.

नमी

90 प्रतिशत

मशरूम में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के पौष्टिक तत्व जो मानव शरीर के निर्माण, पुन: निर्माण एवं वृद्धि के लिये आवश्यक होते हैं, का संक्षिप्त विवरण निम्न प्रकार है:

प्रोटीन: प्रोटीन शरीर के लिए अत्यन्त आवश्यक है जो शरीर के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे शरीर में विभिन्न प्रकार के एन्जाइम एवं हॉरमोन का निर्माण होता है जो शारीरिक क्रियाओं का नियन्त्रण करते हैं। प्रोटीन के मुख्य स्त्रोतों में दलहन, दूध मांस एवं अण्डे के अलावा मशरूम भी एक अच्छा व सस्ता विकल्प है (दयाराम 2016)। ताजे मशरूम में 3.1 प्रतिशत तक प्रोटीन होता है (राणा 2007)। शुष्क पदार्थ के आधार पर मशरूम में लगभग 19-35 प्रतिशत उच्च कोटि की प्रोटीन पायी जाती है (Chang and Buswell 1996) जिसकी पाचन शक्ति 60-70 प्रतिशत तक होती है जो पौधों से प्राप्त प्रोटीन से कही अधिक होती है तथा यह पादप व जन्तु जनित प्रोटीन के मध्यस्थ का दर्जा रखती है (Bano 1976)।

अमीनो एसिड (Amino acids): मशरूम की प्रोटीन में शरीर के लिये आवश्यक सभी अमीनो एसिड जैसे कि मेथियोनिन, ल्यूसिन, आइसोल्यूसिन, लाइसिन, थ्रीयोनिन, टि्रप्टोफेन, वैलीन, हिस्टीडिन और आर्जीनिन आदि की प्राप्ति हो जाती है जो दालों (शाकाहार) आदि में प्रचुर मात्रा में नहीं पाये जाते हैं।

लाइसिन (Lysine) एवं ल्यूसिन (Leucine): मशरूम प्रोटीन में लाइसिन एवं ल्यूसिन नामक अमीनों एसिड अधिक मात्रा में होते हैं जबकि गेहूँ, चावल आदि अनाजों में इसकी मात्रा बहुत कम होती है (Chang and Buswell 1996)। यह अमीनों एसिड मानव के सन्तुलित भोजन के लिये आवश्यक होता है।

ट्यूमर रोधी तत्व (Antitumour elements): मशरूम में कालवासिन, क्यूनाइड, लेंटीनिन, क्षारीय एवं अम्लीय प्रोटीन की उपस्थिति मानव शरीर में टयूमर बनने से रोकती है।

कार्बोहाइडे्टस (Carbohydrates): हमारे शरीर में ऊर्जा का प्रमुख स्त्रोत कार्बोहाइड्रेट्स हैं (दयाराम 2016)। मशरूम में 4-5 प्रतिशत कार्बोहाइडे्टस पाये जाते हैं जिसमें मैनीटाल 0.9, हेमीसेलुलोज 0.91, ग्लाइकोजन 0.5 प्रतिशत विशेष रूप से पाया जाता है।

रेशे (Fibres): ताजे मशरूम में पर्याप्त मात्रा में रेशे (लगभग 1 प्रतिशत) व कार्बोहाइड्रेट तन्तु होते हैं (Singh et al. 2015), यह कब्ज, अपचन, अति अम्लीयता सहित पेट के विभिन्न विकारों को दूर करता है साथ ही शरीर में कोलेस्ट्राल एवं शर्करा के अवशोषण को कम करता है।

वसा (Fat): आज के दौर में मोटापा एक समस्या है जो आधुनिक खान-पान एवं रहन-सहन की शैली की एक बड़ी विकट समस्या है (दयाराम 2016)। मशरूम में वसा न्यून मात्रा में 0.3-0.4 प्रतिशत पाया जाता है तथा आवश्यक वसा अम्ल लिनोलिक एसिड प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होता है। मशरूम में वसा की कुल मात्रा कम (Mattila, Suonpää and Piironen 2000) होने के साथ-साथ इसमें पॉलीअनसेचुरेटिड फैट (Polyunsaturated fat) की मात्रा ज्यादा (72 से 85 प्रतिशत) होने से यह स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है (Chang and Buswell 1996)। प्रति 100 ग्राम ताजा मशरूम से लगभग 35 कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है।

सोडियम (Sodium): इसमें सोडियम साल्ट नहीं पाया जाता है जिसके कारण मोटापे, गुर्दा तथा हृदय घात रोगियों के लिये यह एक आदर्श आहार है। उल्लेखनीय है कि हृदय रोगियों के लिये कोलेस्ट्रॉल, वसा एवं सोडियम साल्ट सबसे अधिक हानिकारक पदार्थ होते हैं।

शर्करा व स्टार्च: मशरूम में शर्करा (0.5 प्रतिशत) और स्टार्च की मात्रा बहुत कम होने के कारण मधुमेह रोगियों के लिये एक आदर्श आहार माना गया है।

जीवाणुरोधी तत्व (Antimicrobial elements): मशरूम में प्यूरीन (Purines), पायरीमिडीन (Pyrimidine), कुनेन (Quinine), टरपेनाइड (Terpinoids) इत्यादि तत्व होते है जो जीवाणुरोधी क्षमता प्रदान करते है।

एर्गोस्टेरॉल (Ergosterol) एवं विटामिन ‘डी’: विटामिन ‘डी’ शरीर में कैल्शियम की उपलब्द्धता प्रदान करने में सहायक होता है जिससे हड्डियाँ एवं दांत मजबूत बनते हैं। इसकी कमी से होने वाली बीमारी को रिकेट्स (Rickets) कहते हैं। प्राकृतिक तौर पर विटामिन ‘डी’ सूर्य के प्रकाश में बैठने से शरीर में बनता है। आज भाग-दौड़ की जीवनशैली में विटामिन डी की कमी हर वर्ग के लोगों में देखने को बहुत मिलती है। मशरूम में यधपि विटामिन ‘डी’ नहीं के बराबर पाया जाता है परन्तु एर्गोस्टेरॉल पाया जाता है, जो मानव शरीर के अन्दर विटामिन ‘डी’ में परिवर्तित हो जाता है (Dubost et al. 2006, दयाराम 2016)।

एर्गोथियोनिन (Ergothioneine): एर्गोथियोनिन एक प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट है जो शरीर की कोशिकाओं की रक्षा में मदद कर सकता है।

विटामिन ए (Vitamin A): विटामिन ‘ए’ की कमी से रतौन्धी (Night blindness) एवं जीरोप्थैल्मिया (Xeropthalmia)रोग होते हैं जिनसे आँखों की रोशनी धीरे-धीरे कम होने लगती है तथा इन्सान अन्धेपन का शिकार हो जाता है। विटामिन ‘ए’ उचित मात्रा में शरीर को मिलने से मूत्रनली में पत्थरी बनने से रोकता है। स्नायु एवं श्वसन संस्थान को ठीक रखता है मशरूम में विटामिन ‘ए’ अंशमात्र मिलता है। अत: इसकी आपूर्ति अन्य साधनों से करना आवश्यक है (दयाराम 2016)।

विटामिन बी-कम्पलेक्स: इसमें आवश्यक विटामिन जैसे थायमिन, राइबोफ्लेविन, नायसिन, बायोटिन, एस्कार्बिक एसिड, पेन्टोथिनिक एसिड पाये जाते हैं। बी विटामिन प्रोटीन, वसा और कार्बोहाइड्रेट्स को तोड़कर ऊर्जा प्रदान करने में सहायता करते हैं (Duyff R., 2012)। बी विटामिन तंत्रिका तंत्र में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

थायमिन वसीय पदार्थों के पाचन एवं अवशोषण में सहायता करता है। इससे स्नायु एवं हृदय सम्बन्धी रोगों से सूरक्षा प्रदान करता है। इसकी कमी से बेरी-बेरी रोग होता है (दयाराम 2016)।

राईफ्लेविन शरीर में चयापचय क्रिया में सहायक होता है (दयाराम 2016)। यह शरीर में हार्मोन के उत्पादन में मदद करता है और तंत्रिका तंत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

निकोटिनिक एसिड शरीर की विभिन्न क्रियाओं के कार्यान्वन में सहायक कार्य करने के साथ-साथ वसा, प्रोटीन एवं कार्बोहाइड्रेट्स की चपापयी क्रियाओं में सहायता करता है। इसकी कमी के कारण जीभ का फटना, त्वचा का लाल रंग व दस्त होता है (दयाराम 2016)।

थायमिन एवं विटामिन बी6 के साथ मिलकर पेन्टोथेनिक एसिड बालों को भूरा होने से बचाता है (दयाराम 2016)।

फोलिक एसिड (Vitamin B10) के द्वारा यकृत में पेन्टोथेनिक एसिड का निर्माण होता है। इसकी कमी से महिलाओं में रक्ताल्पतता (Anaemia) होती है। इससे रक्त धमनियों में खून का थक्का नहीं बनता है। इसे उचित सेवन से लकवा एवं हृदयघात भी नहीं होता है (दयाराम 2016)।

बायोटिन की आवश्यकता मुख्य रूप से फोलिक एसिड एवं पेन्टाथेनिक एसिड के चपापचयी क्रियाओं में आवश्यक है। इसकी कमी से बालों का झड़ने के साथ-साथ त्वचा खुरदरी हो जाती है। इसके सेवन से शरीर में लचीलापन रहता है।

विटामिन बी12 शरीर में नई रक्त कणिकाओं के निर्माण एवं चपापचयी क्रियाओं में सहायता करती है। इसकी कमी के कारण रक्ताल्पतता हो जाती है।

नियासिन स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं को बनाए रखने में मदद करता है। पेंटोथेनिक एसिड त्वचा को स्वस्थ रखता है और पाचन व तन्त्रिका-तन्त्र की कार्यशैली को भी सुनिश्चित करता है (Duyff R. 2012)।

विटामिन सी (Vitamin C): मशरूम में विटामिन ‘सी’ अधिक होने के कारण यह दांतों एवं हड्डियों के लिए भी लाभदायक है (राणा 2007, दयाराम 2016)। इससे कैल्शियम की सक्रियता से शरीर को मजबूती मिलती है। इसकी कमी से स्कर्वी रोग हो जाता है जिससे दांतों के मसूड़ों से खून आने लगता है और हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। यह भोजन में उपलब्द्ध लौह तत्व के अवशोषण में सहयोग करता है।

खनिज लवण: मशरूम में उत्तम स्वास्थ्य के लिये सभी प्रमुख खनिज लवण जैसे - पोटैशियम, फास्फोरस, सल्फर, कैलिशयम, लोहा, ताँबा, आयोडीन और जिंक आदि प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं। ये खनिज अस्थियों, मांसपेशियों, नाड़ी संस्थान की कोशाओं तथा शरीर की क्रियाओं में सक्रिय योगदान करते हैं।

सेलिनियम (Selenium): सेलिनियम एक एंटीऑक्सीडेंट के रूप में काम करता है जिससे शरीर की कोशिकाओं को क्षति से बचाया जा सकता है। इस प्रकार सेलेनियम हृदय रोग, कैंसर और उम्र बढ़ने के साथ अन्य रोगों को कम करने में सहायक हो सकता है। इसके अलावा यह मनुष्यों में प्रतिरक्षा प्रणाली और उर्वरता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण होना पाया गया है (Ferreira Barros and Abreu 2009)।

तांबा (Copper): तांबा लाल रक्त कोशिकाओं में मदद करता है, जो पूरे शरीर में ऑक्सीजन संवाहक हैं। तांबा भी हड्डियों और तंत्रिकाओं को स्वस्थ रखने में मदद करता है (Duyff R., 2012)।

पोटेशियम (Potassium): पोटेशियम सामान्यत तरल पदार्थ और खनिज संतुलन बनाए रखने में सहायता करता है, जिससे रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। यह हृदय सहित अन्य मांसपेशियों और तन्त्रिका-तन्त्र के ठीक से कार्य करने को सुनिश्चित करने में भी भूमिका निभाता है (Duyff R., 2012)।

लौह तत्व एवं फोलिक एसिड: मशरूम में लौह तत्व यधपि कम मात्रा में पाया जाता है लेकिन उपलब्ध अवस्था में होने के कारण रक्त में हीमोग्लोबिन के स्तर को बनाये रखता है साथ ही इसमें बहुमूल्य फोलिक एसिड की उपलब्धता होती है जो केवल मांसाहारी खाध पदार्थो से प्राप्त होता है। अत: लौह तत्व एवं फोलिक एसिड के कारण यह रक्त की कमी की शिकार अधिकांश ग्रामीण महिलाओं एवं बच्चों के लिये सर्वोत्तम आहार है।

संदर्भ

Bano Z., 1976, “Nutritive value of Indian mushrooms and medicinal practices,” Eco. Bot; 31: 367-371.

Chang S.T. and Buswell J.A., 1996, “Mushroom nutriceuticals,” World Journal of Microbiology and Biotechnology; 12(5): 473-476. [Web Reference]

Dubost N.J., et al., 2006, “Identification and quantification of ergothioneine in cultivated mushrooms by liquid chromatography-mass spectroscopy,” International Journal of Medicinal Mushrooms; 8(3): 215-222. [Web Reference]

Duyff R.L., 2012, “American dietetic association complete food and nutrition guide,” Houghton Mifflin Harcourt. [Web Reference]

Ferreira I.C.F.R., Barros L. and Abreu R., 2009, “Antioxidants in wild mushrooms,” Current Medicinal Chemistry; 16(12): 1543-1560. [Web Reference]

Gupta A.K., 2014, Nutritious and medicinal properties of mushrooms, Krishisewa, assessed on February 11, 2018. [Web Reference]

Marshall E. and Nair N.G., 2009, “Make money by growing mushrooms,” Food and Agriculture Organization of the United Nations (FAO). [Web Reference]

Mattila P., Suonpää K. and Piironen V., 2000, “Functional properties of edible mushrooms,” Nutrition 16.7 (2000): 694-696. [Web Reference]

Singh S.S., et al., 2015, “Lectins from edible mushrooms,” Molecules; 20(1): 446-469. [Web Reference]

आर.एस. राणा, जयनारायण भाटिया, आर. एल. मदान, एस.पी. गोयल एवं एम.एस. पंवार, 2007, “खुम्ब उत्पादन: लाभकारी व्यवसाय,” बुलेटिन संख्या (23), विस्तार शिक्षा निदेशालय, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषिविश्वविद्यालय, हिसार।

दयाराम, 2016, “छत्रक,” भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, अनुसंधान निदेशालय, चम्बाघाट, सोलन - 173 213 (हिमाचल प्रदेश), भारत [Web Reference]

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