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कार्बोज़ की कमी का प्रभाव, Effect of degiciency of Carbohydrates

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कार्बोहाइे्रटकार्बोहाइे्रट्स का वर्गीकरणमोनोसैक्राइडडाइसैक्राइडपोलीसैक्राइडकार्बोज की प्राप्ति के साधनकार्बोज़ के कार्यकार्बोज़ की कमी का प्रभाव; कार्बोज की अधिकता का प्रभावकार्बोज की दैनिक ‌‌‌आवश्यकता

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 साधारण रूप से खाना खाने वाले व्यक्ति के शरीर में कार्बोज़ की कमी नहीं होती क्योंकि लगभग सभी ‌‌‌खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। कार्बोज युक्त ‌‌‌खाद्य पदार्थ सस्ते, ‌‌‌स्वाष्दिट तथा ऊर्जा युक्त होने के कारण सभी व्यक्तियों के द्वारा चाव से खाए जाते हैं। जो लोग गरीबी के कारण पट-भर कर खाना नहीं खा पाते, उनके शरीर में कार्बोज की कमी हो जाती है। कार्बोज़ की कमी का प्रभाव से देखा जा सकता है –

1. ‌‌‌बच्चों में कमी का प्रभाव (Deficiency effects in children): - प्राय: पांच वर्श से कम आायु के बच्चों में कार्बोज़ की कमी के लक्षण दिखार्इ देते है। बच्चों को अधिक समय तक केवल पिलाने तथा पूरक आहार न देने से भी प्रोटीन ऊर्जा देने का कार्य करने लग जाती है। इसके फलस्वरूप् प्रोटीन तथा ऊर्जा दोनों की कमी के लक्षण दिखार्इ देने लग जाते हैं। इस स्थिति को मरासमिक कवाशियरकर (Marasmic Kwashiorker) या प्रोटीन-कैलोरी कु‌‌‌पोषण (Protein Caloric Malnutrition) कहते हैं।

2. बड़ो में कमी का प्रभाव (Deficiency effects in adults): कार्बोज की कमी प्राय: उन प्रौढ़ व्यक्तियों में पार्इ जाती है जिनके पास दो समय भर पेट खाने के लिए भोजन नहीं होता। ऐसे व्यक्ति शारीरिक श्रम भी प्राय: अधिक करते हैं, इसलिए उनकी ऊर्जा ‌‌‌आवश्यकता भी अधिक होती है। अधिक श्रम करने और कम ऊर्जा मिलने से उनके शरीर में कार्बोज की कमी हो जाती है इस कमी के कारण शरीर का भार कम हो जाता है, थकावट तथा आलस्य महसूस होता है। ग्लायकोजन का भण्डार कम हो जाता है क्योंकि ऊर्जा की ‌‌‌आवश्यकता रहती है।

कार्बोज की कमी मधुमेह के रोगियों में भी जाती है क्योंकि उनके शरीर में कार्बोज चयापचय ठीक प्रकार से नहीं हो पाता। कार्बोज की कमी की अवस्था में ऊर्जा प्राप्ति के लिए शरीर में वसा का ऑक्सीकरण तेजी से होने लगता है। इसके फलस्वरूप यकृत में कीटोन बॉडीज (एसिटो एसिटिक अम्ल, बीटा हाइड्रोक्सी ब्यूटाइरिक अम्ल तथा एसिटोन) अधिक बनने लगते हैं।

 

सामान्यत: रक्त हल्का क्षारिय (Alkaline) होता है तथा सभी एन्जाइम तभी अपना-अपना कार्य कर सकते हैं जब रक्त की प्राकृति क्षारीय बनी रहे। कीटोन बॉडीज की पाकृति तीव्र अम्लीय होती है। इससे रक्त अम्लीय प्राकृति हो जाता है। यह स्थिति कीटोसिस (Acidosis or Ketosis) कहलाती है। रक्त की क्षारीयता काफी मात्रा में कम हो जाए जो बेहोशी (coma) आने लगती है। मधुमेह रोग में ऐसी स्थिति हो सकती है।

‌‌‌सरोज बाला, ‌‌‌कुरूक्षेत्र (‌‌‌हरियाणा

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