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पूर्ण चन्द्रोदय (सुवर्ण घटित)

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गुण व उपयोग: यह औषधी शरीर की सभी कलाओं में सर्वदा नवीनता का संचार करती है, जिससे शरीर के सभी अंग सक्रिय और स्वस्थ रहते हैं। आन्त्र की श्लेष्मकलाओं पर इसका प्रभाव पड़ता है। पाचक रसों की उत्पत्ति सर्वदा स्वस्थता पूर्वक रहती है। शरीर वीर्यवान, कान्तिवान, बलवान तथा आयुष्मान रहता है। शारीरिक क्षीणता, मानसिक दुर्बलता आदि के लिए यह उत्तम पौष्टिक रसायन है।

मात्रा व अनुपान: 62.5 से 125 मिलीग्राम, दिन में दो बार शहद के साथ या चिकित्सक के परामर्श के अनुसार।

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