Home | आयुर्वेद संग्रह | ‌‌‌कुपीपक्व रसायन | सिद्धमकरध्वज-स्पेशल (स्वर्ण-मुक्ता-कस्तूरीयुक्त)

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सिद्धमकरध्वज-स्पेशल (स्वर्ण-मुक्ता-कस्तूरीयुक्त)

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गुण व उपयोग: अष्टांग संस्कारित एवं षड्गुणबलिजारित पारद से निर्मित मकरध्वज, स्वर्णभस्म, कस्तूरी और मोती भस्म आदि से निर्मित सिद्धमकरध्वज- स्पेशल आयुर्वेद जगत् की परमोत्कृष्ठ औषधी है। इसके सेवन से रस-रक्तादि सप्त धातुओं की वृद्धि होती है तथा प्रमेह, मधुमेह, धातुदौर्बल्य, शुक्र की क्षीणता, वीर्य का पतलापन, शीघ्रदोष, नपुंसकता आदि को शीघ्र नष्ट करके वीर्य को गाढ़ा एवं निर्मल बनाता है और रोग-प्रतिरोध शक्ति की अपूर्व वृद्धि होती है। अनुपान भेद से समस्त प्रकार के रोगों में इसका सफल प्रयोग होता है। यह शारीरिक एवं मानसिक दुर्बलता को मिटाकर शरीर में नवीन शक्ति एवं स्फूर्ति को उत्पन्न करती है। पौरूष शक्ति बढ़ाने तथा शरीर को कान्तिमय बनाने के लिए यह सर्व प्रसिद्ध है। इस औषधी का विशेष प्रभाव स्नायु मण्डल वातवाहिनी नाड़ियों, मस्तिष्क और हृदय पर शीघ्रता से होता है। इसके अतिरिक्त ज्वर, न्यूमोनिया, सर्दी, जुकाम, श्वास, फुफ्फुसीय विकार, राजयक्ष्मा, उर:क्षत, नाड़ी क्षीणता, शोष, शीतांग आदि रोगों में इस औषधी का सफल एवं चमथ्तारिक असर होता है, उन्माद, अपस्मार, मिर्गी, मूच्र्छा, मस्तिष्क की दुर्बलता में इसके सेवने से उत्तम लाभ मिलता है। हृदय की गति बंद होकर मृत्यु से रक्षा करने के लिए परमश्रंष्ठ औषधी है। शरीर में किसी भी कारणवश रक्त की कमी हो जाने पर इसके सेवन से अमृत के समान उत्कृष्ठ लाभ मिलता है और किसी भी कारण से आर्इ हुर्इ कमजोरी शीघ्र नष्ट होती है। बच्चों, वृद्धों, यवाओं, स्त्रियों, पुरूषों सब के लिए समान रूप से लाभदायक है। बहुत से साधन-सम्पन्न व्यक्ति तो शीतकाल में इसका निरन्तर सेवन करते हैं।

मात्रा व अनुपान: 125 मिलीग्राम, दिन में दो बार, सुबह-शाम और बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार कम मात्रा में दें।

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