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आयुर्वेदिक रस

श्वासकुठार रस

गुण व उपयोग: श्वासकुठार रस खाने व सुंघने, दोनों कार्य में आता है। यह खाँसी-श्वास, हिक्का व दमा, ज्वर, सन्निपात, अपस्मार, प्रतिश्याय में उत्तम लाभ
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लोकनाथ रस

गुण व उपयोग: लोकनाथ रस अनिद्रा, अतिसार, संग्रहणी, मन्दाग्नि, पित्त रोग, कफ रोग आदि में उत्तम लाभ प्रदान करता है। मात्रा व अनुपान: 500 से 750...
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लीलाविलास रस

गुण व उपयोग: लीलाविलास रस वमन, हृदय-दाह, कृमि, पांडु, प्रदर, मूत्रकृच्छ और नेत्र-दाह में उत्तम लाभ प्रदान करता है। यह रस उदर और यकृत् की...
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लक्ष्मीविलास रस (रजत युक्त)

गुण व उपयोग: यह रस सन्निपात, कास, प्रतिक्षय आदि में लाभ करता है। इसमें रजत भस्म, अभ्रक भस्म, कज्जली, जावित्री, विजया बीज, जायफल आदि घटक...
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लक्ष्मीविलास रस (नारदीय)

गुण व उपयोग: इसके सेवन से न्यूमोनिया, मियादी बुखार, इन्फ्लूएन्जा, फ्लू, बुखार, जुकाम, खाँसी आदि में उत्तम लाभ मिलता है। इसमें अभ्रक भस्म, शुद्ध गन्धक,...
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लक्ष्मीनारायण रस

गुण व उपयोग: लक्ष्मीनारायण रस महिलाओं के प्रसूता ज्वर में विशेष लाभ करता है। इसके सेवन से वात-पित्त और कफात्मक ज्वर हैजा, विशम ज्वर, अतिसार,...
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लघ्वानन्द रस

गुण व उपयोग: लघ्वानन्द रस पांडु रोग, मन्दाग्नि, ग्रहणी तथा वात-कफ ज्वरों, अरूचि, वात रोग, भ्रम का नाश करता है। मात्रा व अनुपान: 125 मिलीग्राम, दिन...
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लवंगाभ्रक रस

गुण व उपयोग: लवंगाभ्रक रस के सेवन से समस्त प्रकार के अतिसार, ग्रहणी रोग, अग्निमांद्य, प्रवाहिका और अम्लपित्त, शोथयुक्त ग्रहणी रोग, पांडु, कामला आदि रोगों...
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राजमृगांक रस

गुण व उपयोग: राजमृगांक रस के सेवन से राजयक्ष्मा की प्रथम व द्वितीयावस्था में अच्छा लाभ मिलता है। इस रसायन के सेवन से समस्त प्रकार...
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रामबाण रस

गुण व उपयोग: रामबाण रस के सेवन से बदहजमी, मन्दाग्नि, आंव, संग्रहणी व पेट के रोगों में उत्तम लाभ मिलता है। इसमें कज्जली, श्रृंगीविष, सौंठ,...
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रसराज रस (स्वर्ण मुक्तायुक्त)

गुण व उपयोग: यह वात विकार, विशेषतय: शारीरिक अंगों की अशक्तता, आक्षेपक, कानों में आवाज होने आदि में लाभ प्रदान करता है। रक्तचाप नियमित करता...
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रसपीपरी (कस्तूरी-युक्त)

गुण व उपयोग: यह औषधी बच्चों के लिए अमृततुल्य है। यह बच्चों में सर्दी, जुकाम, कफ, खाँसी, ज्वर, दुर्बलता, वमन, पतली टट्टी आदि रोगों में...
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रक्तपित्तकुलकण्डन रस

गुण व उपयोग: रक्तपित्तकुण्डन रस के सेवन से सभी प्रकार के रक्तपित्त, राज:स्राव, रक्तप्रदर, श्वेतज्वर, खूनी बवासीर, प्रमेह, राजयक्ष्मा, श्वास, खाँसी आदि वीर्य विकारों में...
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रत्नगिरी रस

गुण व उपयोग: रत्नगिरी रस का सेवन करने से वात व कफ ज्वर, मन्दागिन, आन्त्रिक ज्वर, वात-कफ रोगों में उचित अनुपान के साथ करने से...
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रत्नगर्भपोट्टली रस

गुण व उपयोग: हीरा, स्वर्ण, रजत आदि बहुमूल्य औषधियों द्वारा निर्मित रत्नगर्भपोट्टली रस क्षय (राजयक्ष्मा), खाँसी, श्वास, संग्रहणी आदि रोगों में उत्तम लाभ प्रदान करता...
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रस कपूर

गुण व उपयोग: रस कपूर के सेवन से अग्नि, बल, वीर्य और कामशक्ति की वृद्धि होती है। इसे लौंग, यफेद चन्दन, कस्तूरी और केशर के...
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याकूति रस

गुण व उपयोग: याकूति रस के सेवन से नाड़ीक्षीणता, शरीर का ठण्डा पड़ जाना, पसीना, श्वास उखड़ना, अनिद्रा, मानसिक दुर्बलता, भ्रम, हृदय की धड़कन आदि...
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योगेन्द्र रस

गुण व उपयोग: योगेन्द्र रस के सेवन से वायु विकृति के कारण हुर्इ अनिद्रा, बेचैनी, शरीर के अंगों की दुर्बलता, घबराहट, रक्तचाप कम व अधिक...
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महावातविध्वंसन रस

गुण व उपयोग: महावातविध्वंसन रस के सेवन से कठिन वात रोग, शरीर के अंगो में आर्इ हुर्इ दुर्बलता, प्लेग, वात विकार, शूल एवं कफ कोक...
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मृतसंजीवनी रस

गुण व उपयोग: मृतसंजीवनी रससन्निपात, विषम ज्वर, शीतपूव्र और दाहज्वर, अग्निमांद्य, आंव के साथ दस्त, वातशूल, गुल्म, प्लीहा, जलोदर, वायु, बद्धकोष्ठ आदि रोगों में उत्तम...
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Featured author
Dr. K.L. Dahiya Veterinary Surgeon, Department of Animal Husbandry & Dairying, Haryana - India