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आयुर्वेदिक रस

एकांगवीर रस

गुण व उपयोग: एकांगवीर रस के सेवन से पक्षाघात, अर्दित गृध्रसी एकांगवात अर्धागवात आदि वात विकारों में अच्छा लाभ मिलता ह, किन्तु पक्षाघात में इसका
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उपदंशकुठार रस

गुण व उपयोग: नए व पुराने उपदंश रोग को नष्ट करने में इसका उपयोग किया जाता है। इसके एक या दो सप्ताह सेवन करने से...
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उन्मादगजांकुश रस

गुण व उपयोग: उन्मादगजांकुश रस का प्रयोग करने से वातज, कफज, पित्तज, द्वन्द्वज, सन्निपातज उन्माद रोग शीघ्र नष्ट होते हैं। इसके अतिरिक्त अपस्मार रोग की...
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उन्मत्त रस

गुण व उपयोग: उन्मत्त रस खाने की औषधी नही है, यह नाक में नस्य के समान सुघाने वाली औषधी है। सन्निपात ज्वर की बेहोशी, अपस्मार,...
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उन्मादगजकेसरी

गुण व उपयोग:  यह उन्माद (पागलपन), मिर्गी, हिस्टीरिया, अनिद्रा, बेहोशी की उत्तम औाषधी है। मात्रा व अनुपान: 250 से 500 मिलीग्राम, विषम भाग घृत के साथ...
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इच्छाभेदी रस

गुण व उपयोग: इच्छाभेदी रस पेट को इच्छानुसार साफ करने वाला तेज विरेचन है। यह कफ और वात को दूर करता है तथा आँतों में...
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इन्दुशेखर रस

गुण व उपयोग: इन्दुशेखर रस गर्भावस्था ज्वर, दुर्बलता, हृदय रोग, खाँसी, श्वास, सिर दर्द, रक्तादिसार, संग्रहणी, वमन, अग्निमांद्य, टज्ञल्सय, स्नायु-दौर्बलयता में उत्तम लाभ प्रदान करता...
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आनन्दभैरव रस (कास)

गुण व उपयोग: यह कफ प्रधान, श्वास रोग, जुकाम के साथ खाँसी, कोष्ठशूल, कफ का बनना, अपस्मार, वातरोग, प्रमेह, अजीर्ण, खाँसी, श्वास, अतिसार, ग्रहणी, सन्निपात...
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आमवातारि रस

गुण व उपयोग: यह रस कठिन वात-दोष, आमवात, हाथ-पैर, समूचे शरीर की सूजन, सुर्इ चुभोने जैसी अनुभूति में विशेष लाभ प्रदान करता है। मात्रा व अनुपान:...
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अश्वकंचुकी रस

गुण व उपयोग: अश्वकंचुकी रस में हरताल, जमालगोटा आदि औषधियाँ होने से यह उष्णवीर्य है। यकृत व उदर रोगों में इसके सेवन से लाभ मिलता...
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आनन्दभैरव रस (ज्वर)

गुण व उपयोग: इसके सेवन से सभी प्रकार के ज्वरों में उत्तम लाभ मिलता है। जब बुखार उच्च वेग पर हो तो इसकी एक गोली,...
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अर्शकुठार रस

गुण व उपयोग: अर्शकुठार रस के सेवन से अर्श, में विशेष लाभ मिलता है। शुरूआती अर्श में यह मस्से सुखाकर रोगी को लाभ देता है।...
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अमृतार्णव रस

गुण व उपयोग: अमृतार्णव रस के सेवन से अतिसार, पतले दस्त होना, संग्रहणी, बवासीर, अम्लपित्त और मन्दाग्नि, गुल्म, कास आदि रोगों में लाभ मिलता है। मात्रा...
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अमृतकलानिधि रस

गुण व उपयोग: यह रस पित्त और कफदोषजन्य ज्वर, मन्दाग्नि, अजीर्ण, उदरशूल, आमदोष आदि विकारों को नष्ट करता है। मात्रा व अनुपान: 1 से 2 गोली...
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अमीर रस

गुण व उपयोग: अमीर रस आतशक, रक्तवाहिनी तथा वातवाहिनी के विक्षोभ, अर्द्धाङग् और सन्धिगत वात, सूजाक आदि में उत्तम लाभ प्रदान करता है। यह तीव्र...
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अर्द्धनारीनटेश्वर रस

गुण व उपयोग: अर्द्धनारीनटेश्वर रस सुन्नपात, तन्द्रा, निद्रा न आना, सिर दर्द, कास, श्वास, मूर्च्छा, कफ की प्रबलता आदि में नस्य देने से लाभ मिलता...
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अगस्ति सूतराज रस

गुण व उपयोग: अगस्ति सूतराज रस सूजन, दाह, संग्रहणी, अतिसार, वमन, पेट दर्द, आमांश, कफ-वात विकार, अग्निमांद्य, अनिद्रा, आमाशय व पक्वाशय की विकृति में सेवन...
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अग्निसूनु रस

गुण व उपयोग: अग्निसूनु रस के सेवन करने से शूल, गुल्म, पांडुरोग, अर्श, ग्रहणी रोग, शोष, ज्वर, अरूचि और मन्दाग्नि आदि उदर रोग नष्ट होते...
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अग्निकुमार रस

गुण व उपयोग: अग्निकुमार रस के सेवन से अजीर्ण, मन्दाग्नि, संग्रहणी, कब्ज, आंतो में मल इकट्ठा होना, पेट में दर्द व पेट भारी रहना, पतली...
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अर्धांगवातारि रस

गुण व उपयोग: अर्धांगवातारि रस मेद्धवृद्धि, मन्दाग्नि, पित्तदोष आदि में लाभकारी है। वातवाहिनीयों एवं रक्तवाहिनियों में जमे हुए कफ व मेद को नष्ट करके उनकी...
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Featured author
Dr. K.L. Dahiya image Veterinary Surgeon, Department of Animal Husbandry & Dairying, Haryana - India