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हेमगर्भ पोट्टली रस

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गुण व उपयोग: इस रस के सेवन से पुरानी खाँसी, शारीरिक क्षीणता, संग्रहणी आदि रोगों में उत्तम लाभ मिलता हैं यह दीपन, त्रिदोषनाशक व अग्निवर्द्धक है।

मात्रा व अनुपान: 30 से 125 मिलीग्राम, दिन में दो बार शहद, मिश्री, मक्खन, मलार्इ आदि के साथ अथवा रोगानुसार अनुपान के साथ।

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