Sections

Newsletter
Email:
Poll: Like Our New Look?
Do you like our new look & feel?

सन्निपातभैरव रस

Font size: Decrease font Enlarge font

गुण व उपयोग: सन्निपातभैरव रस के सेवन से ज्वर और सन्निपात के तीव्र विकारों में लाभ मिलता है। इसमें शुद्ध गन्धक, शुद्ध हिन्गुल, सुहागा फूला व नींबू रस आदि घटक द्रव्य होते हैं।

 

मात्रा व अनुपान: 1-1 गोली, दिन में दो बार दूध या शहद के साथ अथ्वा चिकित्सक के परामर्श अनुसार।

 

विशेष: जिस सन्निपात में पित्त बढ़ा हुआ हो, मुँह सूखना, प्यास लगना, चक्कर आना, देह में जलन, हाथ-पाँव और आँखों में जलन, दस्त होना, बुखार में शरीर का तापमान अधिक हो तो ऐसी अवस्था में सह रस नही देना चाहिए।

 

Rate this article
0