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शिवताण्डव रस

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गुण व उपयोग: शिवताण्डव रस अपनी तीक्ष्णता के कारण कफदोष नष्ट कर पित्त को जागृत करता और फिर पित्त खून में मिल कर सम्पूर्ण शरीर में दौड़ता है, जिससे सारा शरीर गर्म हो जाता है और शिथिल हुए अवयवों में भी ताकत आ जाती है और ये अपनी क्रिया करने में समर्थ हो जाते हैं। यह रस तीक्ष्ण और उष्ण-वीर्य प्रधान है।

मात्रा व अनुपान: 125 से 250 मिलीग्राम, दिन में दो बार अदरक के रस और शहद के साथ।

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