Sections

Newsletter
Email:
Poll: Like Our New Look?
Do you like our new look & feel?

योगेन्द्र रस

Font size: Decrease font Enlarge font

गुण उपयोग: योगेन्द्र रस के सेवन से वायु विकृति के कारण हुर्इ अनिद्रा, बेचैनी, शरीर के अंगों की दुर्बलता, घबराहट, रक्तचाप कम अधिक होना दोनों अवस्थाओं में यह उत्तम लाभ प्रदान करता है। यह मस्तिष्क, फेफड़े हृदय को ताकत देने वाला है। इसमें लौह, स्वर्ण, बंग, अभ्रक भस्म रससिन्दूर आदि घटक द्रव्य सम्मिलित होते हैं। यह उन्माद, मूच्र्छा, हिस्टीरिया, पक्षाघात, अर्दित, मन्यास्तम्भक, हनुग्रह, शरीरेन्द्रियों की दुर्बलता, वातज-पित्तज रोग, गृध्रंसी आदि में भी यह रस लाभ प्रदान करता है। बीमारी के बाद की कमजोरी और साधारण कमजोरी को दूर कर बल बढ़ाने के लिए इस रस का उपयोग किया जाता है। हृदय के रोगों में भी इसके सेवन से बहुत सफलता मिलती है। यह रस-रक्तादि धातुओं को पुष्ट कर शरीर को बलवान बनाता है और वीर्य दोष, स्वप्नदोष, वीर्य का पतलापन, शीघ्रपतन आदि दोषों को दूर करता है तथा पाचकपित्त को उत्तेजित कर पाचनक्रिया को सुधरता है। वात्त-पित्त प्रधान पक्षाघात रोग के लिए यह सर्वोत्तम औषधी है।

मात्रा अनुपान: 125 से 250 मिलीग्राम शहद या रोगानुसार अनुपान के साथ।

Rate this article
2.00