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मूत्रकृच्छान्तक रस

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गुण उपयोग: मूत्रकृच्छान्तक रस मूत्रकृच्छ, सभी प्रकार के मूत्र विकार, मूत्राघात, अश्मरी, शर्करा, वृक्कशूल, बस्तिशूल या तूनी-प्रतितूनी, आंत-वृद्धि आदि किसी भी कारण से हुए मूत्रावरोध में ठण्डे पानी के साथ सेवन करने या फलों के रस के साथ लेने पर पेशाब खुलकर साफ आता है।

मात्रा अनुपान: 250 से 500 मिलीग्राम मिश्री के साथ, ऊपर से ठण्डा पानी या दूध की लस्सी पिला दें।

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