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पंचवक्त्र रस

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गुण व उपयोग: यह रस नवीन ज्वर को एक प्रहर में, मध्य और जीर्ण ज्वर को तीन दिन में तथा सन्निपात ज्वर को सात दिन में दूर करता है। यह रसायन वात-कफ प्रधान ज्वर, सन्निपात ज्वर, इन्फ्लूएन्जा, तन्द्रा, आलस्य, सर्वांग में दर्द आदि रोगों में बहुत उपयोगी है। कफ और वात प्रधान ज्वर, सन्निपात व इन्फ्लूएन्जा आदि रोगों में इसके उपयोग से बहुत लाभ होता है। इस रसायन का प्रभाव मूत्रपिण्ड पर भी पड़ता है। किन्ही कारणों से पेशाब रूक जाने अथवा खुलकर पेशाब लाने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है।

मात्रा व अनुपान: 1-1 गोली, सुबह-शाम, शहद, अदरक के रस के साथ या रोगानुसार अनुपान के साथ।

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