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प्रदररिपु रस

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गुण व उपयोग: प्रदररिपु रस पुरूष को शुक्रपात विशेष होने से शुक्र पानी जैसा पतला होकर बहने लगता है, वैसे ही स्त्रियों को भी अधिक दिनों तक प्रदर शिकायत होने से रज पानी जैसा पतला हो स्राव होने लगता है, इसमें गर्भाशय कमजोर हो जाता है और यह स्राव बिना मालूम पड़े भी हो जाता है, जैसे निद्रावस्था में या कहीं बैठे-बैठे ही अथवा ज्यादा चलने-फिरने आदि से भी हो जाता है। बढ़े हुए प्रदर में अर्थात जिस समय रक्त का प्रवाह जोरों से हो उस समय इसका प्रयोग करना चाहिए तथा भोजनोत्तर अशोकारिष्ट 20 मिलीलीटर में समान भाग पानी मिलाकर विशेष लाभदायक है।

मात्रा व अनुपान: 1 से 2 गोनी, सुबह-शाम खूनखराबा 1 ग्राम और शहद से चटाकर ऊपर से चावल का पानी या अशोक की छाल का क्वाथ उत्तम लाभ करता है।

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