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नष्टपुष्पान्तक रस

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गुण व उपयोग: नष्टपुष्पान्तक रस उग्र और उष्णवीर्य है। इस रस के सेवन से मासिक धर्म साफ कर विकारों को शान्त करता है। जब मासिक धर्म रूक गया हो या दर्द के साथ थोड़ा-थोड़ा होता हो अथवा पूरी उम्र होन पर भी रजोदर्श नही हुआ हो तो नष्टपुष्पान्तक रस का उपयोग किया जाता है। रजोरोध के कारण स्त्रियों की आँखों में जलन, अनिद्रा, हाथ-पैर में फूटन तथा तलवों में जलन, सिर दर्द, कटि और पुष्ठशूल, हृच्छूल, उन्माद, हिस्टीरिया, वात एवं पित्त के विकार आदि अनेक विकार हो जाते हैं। जिन स्त्रियों के शरीर में रक्त की कमी के कारण मासिक धर्म नही होता हो, उनको कसीस या लौह भस्म के साथ नष्टपुष्पान्तक रस का सेवन करने से शरीर में रक्त वृद्धि होकर मासिक धर्म नियमित रूप से होने लगता है।

मात्रा व अनुपान: 1 से 2 गोली, दिन में दो बार तिल के क्वाथ में गुड़ के साथ।

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