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चन्द्रांशु रस

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गुण व उपयोग: चन्द्रांशु रस गर्भाशय दोष, योनि शूल, योनि में पीड़ा एवं दाह होना तथा योनि की स्थान भ्रष्टता (अपने स्थान से हट जाना, विकृत हो जाना आदि), योनि में खरिश होना, रजोदोष, कामवासनाओं की शान्ति न होन के कारण उत्पन्न हिस्टीरिया आदि रोगों में उत्तम लाभ प्रदान करता है। यह गर्भाशय को ताकत प्रदान करने वाला है।

मात्रा व अनुपान: 1-1 गोली, दिन में दो बार जीरा क्वाथ, गाय के दूध, जटामांसी क्वाथ या रोगानुसार अनुपान के साथ।

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