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ग्रहणीकपाट रस (न. 2)

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गुण व उपयोग: इसके सेवन से सभी प्रकार के अतिसार, ग्रहणी, ज्वर, शूल, अग्निमांद्य, अरूचि और आमवात रोग आदि में शीघ्र लाभ मिलता है। यह दीपन-पाचन है। यह विशेष रूप से बच्चों के दस्त, वमन आदि में उत्तम लाभ करता है।

मात्रा व अनुपान: 1-1 गोली, शहद, शंख, घी और मिर्च के चूर्ण के साथ या छाछ के साथ। बच्चों का ½ गोली देनी चाहिए।

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