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कालकूट रस

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गुण उपयोग: कालकूट रस अतिउग्र है। यह सन्निपात, ग्रन्थिक, धातुर्वातादि, वात-विकार, बेहोशी, प्रलाप, आँखों की तन्द्रा, श्वास, कफयुक्त खाँसी, कंप, हिचकी वात, कफ की अधिकता सन्निपात ज्वर में इसके सेवन से विशेष लाभ मिलता है। इसका प्रयोग बहुत सावधानीपूर्वक करना चाहिए। क्योंकि यह अतिउग्र है। अन्तिमावस्था में जब मकरध्वज आदि से भी लाभ हो एवं नाड़ी लुप्त हो रही हो, शरीर ठण्डा हो रहा हो, सिर्फ हृदय गति बनी हुर्इ हो, तथा जब कभी थोड़ी-बहुत श्वास की गति मालूम पड़ती हो, तो ऐसी विकट परिस्थिती में इसका प्रयोग करना चाहिए। यह हृदय को बल देने वाला है इसके सेवन से रक्तचाप बढ़ता है। यह नाड़ी की गति में वृद्धि करने वाला है।

मात्रा अनुपान: 1 गोली सुबह-शाम अदरक के रस या शहद के साथ।

विशेष: इस औषधी के उपयोग के परिणाम विधान से अज्ञात चिकित्सकों को इसका उपयोग भली प्रकार सोचकर निर्णय लेकर किसी अनुभवी चिकित्सक से परामर्श कर करना चाहिए।

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