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कृमिमुगद्र रस

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गुण उपयोग: कृमिमुगद्र रस कृमिकुठार रस से तीक्ष्य और उग्रवीर्य है। यह पेट के कीड़ों को नष्ट करने वाला एवं इन कृमियों के कारण होने वाले उपद्रव जैसे कि ज्वर, जी मिचलाना, देह में खुजलीश् कहीं देह में खुजलाने से लाल चकते पड़ जाना, अन्न में अरूचि, भूख लगनाख् वमन होनाख् हिचकी आदि लक्षणों में लाभ मिलता है।

मात्रा अनुपान: 250 - 500 मिलीग्राम शहद के साथ दें, ऊपर से नागरमोथा का क्वाथ पिलाएं। इसे तीन दिन तक सेवन करने के बाद चौथे दिन जुलाब लेना चाहिए।

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