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कृमिकुठार रस

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गुण उपयोग: कृमिकुठार रस का सेवन मुख्यत: पेट के कीड़े नष्ट करने हेतु किया जाता है। कृमियों के कारण ग्लानि, भ्रम, मुख् से लार गिरना, पेट तथा गुदा में कैंची से काटने जैसी पीड़ा, कब्ज, मल शुष्क होना, अनिद्रा, पांडु, शोथ आदि विकार उत्पन्न हो जाते हैं। इस रस के 21 दिन या आवश्यकतानुसार अधि समय तक लेने से कृमि रोग नष्ट हो जाते हैं। इसके सेवन काल में तीसरे या चौथे दिन रात को सोते सोते समय ‘पंचसकार चूर्ण’ 6 ग्राम गर्म पानी से लेना चाहिए ताकि कोष्ठ शुद्धि होकर मरे हुए कृमि बाहर निकल आएं।

मात्रा अनुपान: 2 से 4 गोली, सुबह-शाम खाकर ऊपर से नागर मोथा का क्वाथ पीना चाहिए।

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