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उन्मादगजांकुश रस

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गुण उपयोग: उन्मादगजांकुश रस का प्रयोग करने से वातज, कफज, पित्तज, द्वन्द्वज, सन्निपातज उन्माद रोग शीघ्र नष्ट होते हैं। इसके अतिरिक्त अपस्मार रोग की यह श्रेष्ठ औषधी है एवं मस्तिष्क की दुर्बलता से होने वाले विकार, मूच्र्छा, बेहोशी, हिस्टीरिया, अनिद्रा आदि रोग नष्ट होते हैं। विशेषतय: भूतोन्माद, प्रेत-पिशाचादि जनित उन्माद (पागलपन) रोग के लिए उत्कुष्ठ औषधी है।

मात्रा अनुपान: 1-1 गोली, दिन में दो बार सुबह-शाम विषम भाग घृत और शहद के साथ या ब्रह्मी घृत और मिश्री के साथ ब्रह्मी-स्वरस के साथ।

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