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गर्भावस्था में व्यायाम का महत्व

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गर्भावस्था में महिलाओं के लिए शारीरक तौर पर चुस्त रहना आवश्यक है किन्तु डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। अगर आपने पहले व्यायाम नहीं किया है तो प्रथम 12 हफ़्तों के पश्चात व्यायाम करना प्रारम्भ करें।

व्यायाम करने से गर्भावस्था स्वस्थ होती है।

इससे रक्त का संचारण भी ठीक होता है जो गर्भावस्था में होने वाली परेशानियों व दर्द से बचाता है और शरीर को टोन करता है और लेबर को आसान बनाता है।

व्यायाम का लाभ केवल आपको ही नही मिलता इसका लाभ गर्भस्थ शिशु को भी मिलता है, उसका चपापचय और रक्त संचार सही रहता है और साथ उसका हृदय भी स्वस्थ होता है।

सूजन, ज्यादा फैट्स, तनाव, ब्लड प्रेशर सभी व्यायाम के कारण नियन्त्रण में रहते हैं। हल्का-फुल्का वर्क-आउट किया जा सकता है क्योंकि यह चिकित्सकीय तौर पर अच्छा माना जाता है।

ऐसा व्यायाम चुनें जो पीठ और पेट के लिए हो जिनसे पोस्चर सही रहता हो और जो प्रसव के बाद भी ताकत मिलती हो।

स्ट्रेच करने से तनाव कम होता है और शरीर भी कोमल होता है।

चिल्ड्रन पोज़, टेलर स्ट्रेच और फुल बैक स्ट्रेच जैसी एक्सरसाइज करें।

श्वास से सम्बंधित व्यायाम भी करें जो आप और आपके बच्चे के लिए भी अच्छी होती हैं।

एक अध्धयन के अनुसार एक हफ्ते में व्यायाम के तीन 20-20 मिनट वाले सत्र करें जो बच्चे के दिमाग के लिए लाभदायक होते हैं।

ऐसा भी पाया गया है कि गर्भावस्था में व्यायाम करने वाली महिलाओं में सिज़ेरियन की सम्भावना कम होती है। इसलिए खाली न बैठें। आप और आपका बच्चा व्यायाम का लाभ उठा सकते हैं। कुछ चुनिन्दा स्थितियों में ही डॉक्टर वर्क-आउट के लिए मना करते हैं। ऐसा तब होता है जब प्लेसेंटा काफी नीचे हो, पहले गर्भपात हुआ हो या कुछ अन्य लक्षण जिसकी वजह से महिला को बेड रेस्ट की ज़रूरत हो।

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