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क्रॉस स्टिच (Cross Stitch)

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क्रॉस स्टिच कढ़ाई का प्रयोग या आरम्भ सबसे पहले जर्मनी, इटली, यूरोप हुआ था। परन्तु भारत में भी इसका प्रचलन बहुत है। यह कढ़ाई घर-घर में की जाती है। यह एक ऐसी कढ़ाई जिसे कपड़े की तारें गिन कर बनाया जाता है। इस कढ़ाई द्वारालेडिज सूट, ब्लाउज, बच्चों के वस्त्र व फ्राक आ​दि भी सजा सकते हैं। इस कढ़ाई के लिए खद्दर केसमेंट तथा सूती कपड़ा, केनवास पर भी की जाती है। इसमें सूती जाली का प्रयोग किया जाता है। इस पर कढ़ाई करके जाली को काट दिया जाता है। इस कढ़ाई के लिए एंकर की गुच्छियाँ प्रयोग की जाती हैं।

आवश्यक सामग्री: सूई, धागा, कपड़ा, फ्रेम व छोटी कैंची।

बनाने की विधि: क्रॉस स्टिच बनाने की निम्न विधियाँ हैं:

(1) सिंगल जर्नी मैथड (Single Journey Method)

(2) डबल जर्नी मैथड (Double Journey Method)

(3) फोर्थ जर्नी मैथड (Fourth Journey Method)

ध्यान रखने योग्य बातें:

(1) कढ़ाई बांए या दांए से भी की जा सकती है।

(2) इस टाँके का रूख एक सार होना चाहिए।

(3) प्रत्येक टाँके की एक जैसी तारें लेनी चाहिए।

(4) टाँके न ही अधिक कसे हों तथा न ही अधिक ढीले हों।

सरोज बाला, ग्लोबल सीटी, कुरूक्षेत्र (हरियाणा)

<हाथ कढ़ाई में बेसिक टाँके (Basic Stitches in Hand Embroidery)

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